विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार
भारत एक्सप्रेस
एक फोन कॉल और 3 बड़ी चूकें… जानिए क्यों आज भी सिहरा देती है 1995 की वह रात?
20 अगस्त 1995 की रात फिरोजाबाद में एक नीलगाय से टकराने के बाद कालिंदी एक्सप्रेस ट्रैक पर रुक गई. कुछ ही देर बाद गलत सूचना के चलते उसी ट्रैक पर तेज रफ्तार पुरुषोत्तम एक्सप्रेस को आगे बढ़ने की अनुमति दे दी गई.
कारोबार से तख्त तक का सफर, आखिर क्यों खास है 1757 में कोलकाता की टकसाल से जारी हुआ वह पहला रुपया?
19 अगस्त 1757 को कोलकाता में ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपना पहला रुपया ढाला था. प्लासी के युद्ध में जीत के बाद कंपनी को बंगाल में आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने का मौका मिला.
तस्वीरें सिर्फ सच नहीं दिखातीं, विश्व फोटोग्राफी दिवस पर जानिए देखने का असली नजरिया
विश्व फोटोग्राफी दिवस पर जॉन बर्जर की चर्चित किताब ‘देखने के तरीक़े’ हमें तस्वीरों को सिर्फ देखने नहीं, बल्कि उनके पीछे छिपे नजरिए और अर्थ को समझने की सीख देती है.
1999 का कारगिल युद्ध, प्लेन हाईजैक ड्रामा और आगरा सम्मेलन, जानें कैसे तानाशाह मुशर्रफ का हुआ अपमानजनक अंत
कारगिल युद्ध के मास्टरमाइंड परवेज मुशर्रफ ने तख्तापलट कर 9 साल तक पाकिस्तान पर राज किया. बाद में देशद्रोह के केस और निर्वासित जीवन बिताते हुए 2023 में दुबई में उनका निधन हो गया.
18 अगस्त 1942: जब गाजीपुर के इस गांव ने अंग्रेजी हुकूमत को दी थी खुली चुनौती, लहू से लिखी गई थी आजादी की इबारत
18 अगस्त 1942 को गाजीपुर के शेरपुर गांव के आठ वीर स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजी हुकूमत की गोलियों का सामना करते हुए तिरंगा फहराया और देश की आजादी के लिए शहादत दी.
रैडक्लिफ की एक लकीर और लाखों जिंदगियों का अंत, जानिए 17 अगस्त को ही क्यों महसूस हुआ था विभाजन का दर्द?
17 अगस्त 1947 को जब भारत और पाकिस्तान की सीमा रेखा सार्वजनिक हुई, तब आजादी की खुशी के बीच लाखों लोगों को अचानक अपनी नई हकीकत का सामना करना पड़ा.
आपातकाल के 50 साल; सत्ता, संघर्ष और लोकतंत्र की अनकही दास्तान बयां करती प्रियंवद की नई किताब
आपातकाल के 50 साल बाद प्रियंवद की किताब ‘भारतीय लोकतंत्र का कोरस’ भारतीय लोकतंत्र की उस यात्रा को सामने रखती है, जिसमें आजादी के बाद के शुरुआती उत्साह से लेकर सत्ता के बढ़ते केंद्रीकरण तक की कहानी दर्ज है.
काशी नरेश महाराज चेत सिंह — अंग्रेजों के खिलाफ काशी का गदर
16 अगस्त 1781 को काशी (बनारस) में महाराज चेत सिंह ने ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ विद्रोह किया था। जानिए कैसे 1857 की क्रांति से 76 साल पहले वारेन हेस्टिंग्स को चुनार भागना पड़ा था।
जिस शख्स ने कभी भारत देखा ही नहीं, उसने कैसे तय कर दी देश की तकदीर? जानें रेडक्लिफ लाइन की अनकही कहानी
15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ, लेकिन आजादी के जश्न के ठीक दो दिन बाद सामने आई रेडक्लिफ रेखा ने लाखों लोगों की जिंदगी बदल दी.
भारत और पाकिस्तान एक ही कानून के तहत आजाद हुए, फिर पाकिस्तान 14 अगस्त को क्यों मनाता है स्वतंत्रता दिवस?
भारत और पाकिस्तान की आजादी की तारीख को लेकर अक्सर भ्रम रहता है. भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के तहत दोनों देश 15 अगस्त 1947 से स्वतंत्र हुए थे, लेकिन पाकिस्तान ने बाद में 14 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस बना लिया.







