विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार
भारत एक्सप्रेस
स्वराज की पहली चिंगारी: अंग्रेज समझते रहे बेवकूफ, दादाभाई नौरोजी ने आंकड़ों के दम पर हिला दी लंदन की हुकूमत
Dadabhai Naoroji Birth Anniversary: दादाभाई नौरोजी ने तथ्यों और आंकड़ों के दम पर ब्रिटिश राज के आर्थिक पाखंड को बेनकाब किया. 'ड्रेन ऑफ वेल्थ' सिद्धांत और 'स्वराज' की मांग के जरिए उन्होंने भारत की आजादी की मजबूत नींव रखी.
पहली कन्नड़ कृति जिसे मिला अंतरराष्ट्रीय बुकर, जानिए क्या खास है बानू मुश्ताक़ के कहानी-संग्रह ‘हृदय दीप’ में
कन्नड़ लेखिका बानू मुश्ताक़ की चर्चित कहानी-पुस्तक ‘हृदय दीप तथा अन्य चयनित कहानियां’ अब हिंदी पाठकों के बीच है.
क्या पूरे भारत के लिए एक ही IST रखना बेहतर है? या देश में एक से ज्यादा Time Zones होने चाहिए; पढ़ें पूरा विश्लेषण
India Time Zone Debate: क्या भारत में एक IST की जगह दो Time Zones होने चाहिए? जानें IST का इतिहास, पूर्वोत्तर की समस्या, UTC+6 प्रस्ताव, ऊर्जा बचत और One Nation One Time की पूरी बहस.
सता के संक्रमण का वो पहला पड़ाव, जानिए कब भारतीयों के हाथ आई देश की कमान
2 सितंबर 1946 भारत की आज़ादी की राह का एक बेहद अहम दिन था. इसी दिन अंतरिम सरकार ने कामकाज संभाला, जिसमें जवाहरलाल नेहरू समेत कई प्रमुख भारतीय नेताओं ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं.
अंतरिक्ष से पृथ्वी देखने का अनोखा अहसास, बुकर विजेता उपन्यास ‘ऑर्बिटल’ के हिंदी अनुवाद को मिला प्रतिष्ठित ‘वैली ऑफ वर्ड्स’ अवॉर्ड
समैंथा हार्वी के बुकर पुरस्कार विजेता उपन्यास ‘ऑर्बिटल’ के हिंदी अनुवाद को वैली ऑफ वर्ड्स बुक अवॉर्ड्स 2026 में सम्मान मिला है.
दुनिया का पहला ATM: 1969 का वो कमाल जिसने 24 घंटे कैश देने की शुरुआत की
World’s first ATM: आज हर ATM से पैसे निकालते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं इसकी शुरुआत कैसे हुई? 2 सितंबर 1969 को लिखी गई थी ATM की पहली बड़ी कहानी. पढ़ीए पूरी खबर
जब एक छोटी सी चिंगारी से राख हो गया था पूरा लंदन, जानें 360 साल पुराना खौफनाक इतिहास
साल 1666 में आज ही के दिन लंदन में एक ऐसी भयानक आग भड़की थी जिसने चार दिनों में पूरे शहर को तबाह कर दिया था. इस ऐतिहासिक त्रासदी ने शहर का नक्शा हमेशा के लिए बदल दिया.
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मकसद नहीं… जानिए आज भी क्यों प्रासंगिक हैं दुष्यंत कुमार की ये अमर पंक्तियां?
दुष्यंत कुमार सिर्फ कवि नहीं, बल्कि आम आदमी की बेचैनी, संघर्ष और बदलाव की उम्मीद की आवाज थे. ‘साये में धूप’ जैसी कृति और उनकी अमर पंक्तियां आज भी व्यवस्था पर सवाल उठाने और बदलाव की उम्मीद जगाने का काम करती हैं.
विदेशी माटी से उपजा हिंदी का सच्चा साधक, जानिए फादर कामिल बुल्के की अनकही कहानी
हिंदी को भारत में शोधपरक विस्तार देने में अहम भूमिका निभाने वाला एक प्रमुख नाम विदेशी मूल का ही है. फादर कामिल बुल्के का जीवन भारतीय भाषा, विशेषकर हिंदी के प्रति गहरे प्रेम और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण है.
जिंदगी बदलने के लिए 100 दिन काफी हैं? डॉ. अमित कुमार की इस किताब में छिपा है सफलता का फॉर्मूला
क्या 100 दिनों में सपनों को हकीकत के करीब लाया जा सकता है? डॉ. अमित कुमार की किताब ‘सपनों से उपलब्धि तक: 100 दिन के सूत्र’ इसी सवाल का व्यावहारिक जवाब तलाशती है.





