Independence Day 2026: ‘भारत एक्सप्रेस न्यूज नेटवर्क’ में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में सीएमडी उपेंद्र राय ने यूनानी दार्शनिक डायोजनीज और सम्राट सिकंदर के ऐतिहासिक संवाद का उदाहरण देते हुए संस्थान के सहयोगियों को सादगी, विनम्रता और जीवन के वास्तविक अर्थ का पाठ पढ़ाया. उन्होंने कहा कि अहंकार से मुक्ति ही मनुष्य का सबसे बड़ा आभूषण है.
सीएमडी ने बताया कि पूरी दुनिया जीतने का ख्वाब देखने वाला सिकंदर जब मृत्यु शय्या पर था, तब उसने अपने डॉक्टर से कहा कि उसका आधा राज्य ले लो लेकिन एक सांस की मोहलत दे दो ताकि वह अपनी माँ से मिल सके. डॉक्टर ने साफ कह दिया कि पूरी सल्तनत देकर भी एक सांस नहीं खरीदी जा सकती. तब सिकंदर को दार्शनिक डायोजनीज की बात याद आई.
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कुत्ते से सीख और भिक्षापात्र का त्याग: डायोजनीज धूप सेक रहे थे जब सिकंदर उनसे मिला था. बाद में जब डायोजनीज ने एक कुत्ते को सीधे नदी से पानी पीते देखा, तो उन्होंने अपना भिक्षापात्र भी फेंक दिया और सादगी को अपना अंतिम गुरु माना.
अहंकार और विनम्रता का संतुलन: सीएमडी ने स्वीकार किया कि हर इंसान में कमियां होती हैं. झुकना और विनम्र होना कोई कमजोरी नहीं बल्कि विचारों से बेहद अमीर लोगों का लक्षण है.
सलीके से बात रखने का हुनर: उन्होंने वसीम बरेलवी का मशहूर शेर उद्धृत किया— ‘कौन सी बात कहां कैसे कही जाती है, कहने का सलीका हो तो हर बात सुनी जाती है’ और कहा कि सार्वजनिक रूप से किसी को अपमानित करने के बजाय विनम्रता से सुधार करना चाहिए.
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भय और अहंकार को त्यागें
सीएमडी उपेंद्र राय ने संबोधन का समापन करते हुए सभी से अपील की कि वे अपने भीतर के भय और अहंकार को त्यागें, दूसरों का सम्मान करें और समाज के निर्माण में एक जागरूक इकाई की तरह योगदान दें.
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