आज बिहार की मिट्टी से निकली उस मधुर आवाज को विदा हुए एक साल हो गया, जो कभी थमती नहीं लगती थी. ‘बिहार कोकिला (Bihar Kokila)’ के नाम से मशहूर पद्म विभूषण शारदा सिन्हा (Sharda Sinha) की पहली पुण्यतिथि पर पूरा देश उन्हें याद कर रहा है. उनकी आवाज में बसे छठ गीत, भोजपुरी लोकगीत और मैथिली धुनें आज भी घर-घर गूंज रही हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी स्मृति में भावुक श्रद्धांजलि दी, जिसमें उन्होंने कहा, “बिहार कोकिला शारदा सिन्हा जी की पहली पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि. उन्होंने बिहार की कला-संस्कृति को लोकगीतों के माध्यम से एक नई पहचान दी, जिसके लिए उन्हें सदैव याद किया जाएगा. महापर्व छठ से जुड़े उनके सुमधुर गीत हमेशा जनमानस में रचे-बसे रहेंगे.”
बिहार को सांस्कृतिक सूत्र में पिरोया
शारदा सिन्हा का जन्म 9 अक्टूबर 1952 को बिहार के समस्तीपुर जिले में हुआ था. उन्होंने संगीत की शिक्षा पटना विश्वविद्यालय से ली और जल्द ही लोक संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना ली. पद्म श्री (2018), पद्म भूषण (2019) और पद्म विभूषण (2024) जैसे सम्मानों से नवाजी गईं शारदा सिन्हा ने भोजपुरी, मैथिली और मगही लोकगीतों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचाया. उनके गीत जैसे “विवाह गीत”, “छठ पूजा के गीत” और “कजरी” ने न सिर्फ बिहार की संस्कृति को जीवंत रखा, बल्कि एक सूत्र में बांधा.
कैंसर से जूझते हुए 5 नवंबर 2024 को उन्होंने अंतिम सांस ली, लेकिन उनकी विरासत आज भी जीवित है. लोक संगीत की अमर धरोहर शारदा सिन्हा का योगदान सिर्फ गीतों तक सीमित नहीं था. उन्होंने बिहार की लोक परंपराओं को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई. छठ पूजा के दौरान उनके गीत “उग हे सुरुज देव” या “केलवा के पात पर” सुनकर लाखों लोग भावुक हो जाते हैं. उन्होंने बॉलीवुड में भी अपनी छाप छोड़ी, फिल्मों जैसे “मैंने प्यार किया” और “हम आपके हैं कौन” में गीत गाए.
बिहार के लोकगीतों को दिलवाया पहचान
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने उनकी याद में कहा कि उनकी मधुर आवाज़ ने बिहार की संस्कृति, भावनाओं और परंपराओं को हर घर तक पहुंचाया. दूरदर्शन ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि लोकसंगीत की साधना से वे जन-जन के हृदय तक पहुंचीं और भारतीय संगीत को नई ऊंचाइयां दीं.
सोशल मीडिया पर #ShardaSinha और #BiharKokila ट्रेंड कर रहे हैं, जहां लोग उनके गीत शेयर कर भावुक पोस्ट लिख रहे हैं. पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास ने लिखा, “उनकी सुमधुर आवाज ने भोजपुरी संगीत और बिहार के लोक गीतों को अलग पहचान दिलाई.”
बिहार की आत्मा
आज के डिजिटल युग में शारदा सिन्हा के गीत यूट्यूब और स्पॉटिफाई पर करोड़ों व्यूज पा रहे हैं. युवा कलाकार उन्हें कॉपी कर नए वर्जन बना रहे हैं, जो साबित करता है कि उनकी विरासत समय के साथ और मजबूत हो रही है.
शारदा सिन्हा जी की आवाज कभी नहीं थमेगी. वे बिहार की आत्मा हैं, जो हर छठ पूजा, हर विवाह और हर उत्सव में गूंजती रहेंगी.
-भारत एक्सप्रेस
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