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पाकिस्तान ने जारी किया महर्षि पाणिनि पर स्मारक डाक टिकट, जानिए क्यों आज भी AI के दौर में प्रासंगिक हैं अष्टाध्यायी के सूत्र

पाकिस्तान सरकार ने प्राचीन भारत के महान भाषाविद् और व्याकरणशास्त्री महर्षि पाणिनि पर 75 रुपये का एक विशेष स्मारक डाक टिकट जारी किया है. वर्तमान पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में जन्मे पाणिनि की अमर कृति ‘अष्टाध्यायी’ के सिद्धांत आज भी कंप्यूटर विज्ञान और AI में प्रासंगिक हैं.

Pakistan Issues Commemorative Postage Stamp On Maharishi Panini
Edited by Vaibhav Gupta

दुनिया के प्रथम महान व्याकरणशास्त्री, भाषाविद् और ऋषि महर्षि पाणिनि की अमर कृति अष्टाध्यायी आज भी भाषा विज्ञान की नींव मानी जाती है. लगभग ढाई हजार वर्ष पूर्व कांधार के निकट शालातुली (शालातुर) गांव में जन्मे पाणिनि का जीवन ज्ञान की तलाश और गहन चिंतन का प्रतीक है.

पंचतंत्र की प्रसिद्ध कथा के अनुसार, जब वे वन में व्याघ्र शब्द की धातु और उत्पत्ति पर विचारमग्न थे, तभी एक सिंह ने उन पर आक्रमण कर दिया. इतने गहन समाधि में थे कि उन्होंने खतरे पर ध्यान ही नहीं दिया. इस प्रकार विश्व को व्याकरण का अमर ग्रंथ देने वाले ऋषि का जीवन समाप्त हुआ.

पाकिस्तान का सम्मान

समाचार यह है कि पाकिस्तान सरकार ने हाल ही में महर्षि पाणिनि पर एक स्मारक डाक टिकट जारी किया है. 75 रुपये के मूल्य वाला यह टिकट पाणिनि की विरासत को स्वीकार करते हुए उनके जन्मस्थान (वर्तमान स्वाबी जिले, खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र) और प्राचीन तक्षशिला विश्वविद्यालय से जुड़ी सांस्कृतिक धरोहर को रेखांकित करता है.

टिकट की डिजाइन में पाणिनि का चित्र, संस्कृत के सूत्र और पाकिस्तान पोस्ट का आधिकारिक लेआउट देखकर कई लोगों का मन प्रसन्न हो गया, जैसा कि मूल पोस्ट में उल्लेख है. यह टिकट प्राचीन गंधार क्षेत्र की बौद्धिक विरासत को समर्पित है, जहां पाणिनि ने अपनी रचना की.

पाणिनि की सार्वभौमिक विरासत

पाणिनि की अष्टाध्यायी में लगभग 4,000 सूत्र हैं, जो भाषा के नियमों को इतनी सूक्ष्मता से परिभाषित करते हैं कि आधुनिक कंप्यूटर विज्ञान, भाषा विज्ञान और यहां तक कि एआई में भी उनके सिद्धांतों की प्रासंगिकता बनी हुई है. वे विश्व के प्रथम वैज्ञानिक भाषाविद् माने जाते हैं.

भारत ने भी वर्ष 2004 में पाणिनि पर डाक टिकट जारी किया था. अब पाकिस्तान का यह कदम दिखाता है कि सभ्यतागत और बौद्धिक विरासत सीमाओं से परे है. गंधार, तक्षशिला और शालातुर जैसी जगहें आज दोनों देशों के भूगोल में हैं, लेकिन उनका ज्ञान पूरे मानव समाज का साझा खजाना है.

सकारात्मक संदेश

इस टिकट की चर्चा करते हुए यह खुशी की बात है कि पड़ोसी देश अपनी प्राचीन सांस्कृतिक जड़ों को पहचान रहे हैं. पाणिनि का सम्मान करते हुए पाकिस्तान ने एक ऐसे ऋषि को याद किया है, जिनकी देन किसी एक देश, जाति या धर्म तक सीमित नहीं है.

पाणिनि और पाकिस्तान

हैशटैग के साथ यह खबर सोशल मीडिया पर चर्चित हुई. आशा है कि ऐसी पहलें साझा इतिहास को समझने और सांस्कृतिक आदर का वातावरण बनाने में मदद करेंगी. पाणिनि का संदेश ‘ज्ञान की खोज में इतना तल्लीन हो जाओ कि संसार के सारे व्याघ्र भी अनदेखे रह जाएं’ आज भी प्रासंगिक है. यह टिकट न केवल पाणिनि की याद दिलाता है, बल्कि यह भी कि विरासत का सच्चा सम्मान सीमाओं से ऊपर उठकर होता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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