गुजरात का आईटी सेक्टर तेजी से प्रगति कर रहा है. नेसकॉम द्वारा संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, राज्य का आईटी निर्यात वित्त वर्ष 2019-20 में 3,570 करोड़ रुपये था, जो 2023-24 में बढ़कर 8,703 करोड़ रुपये हो गया है.
आईटी सेक्टर में गुजरात की बड़ी छलांग
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अंतर्गत आने वाले सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) के आंकड़े बताते हैं कि गुजरात, जो पहले आईटी सेक्टर में पिछड़ा हुआ था, अब तेजी से आगे बढ़ रहा है.
GESIA आईटी एसोसिएशन के पूर्व चेयरमैन तेजिंदर ओबेरॉय के अनुसार, “गुजरात का आईटी निर्यात चार साल में दोगुना हो गया है. डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और छोटे व मध्यम उद्योगों (SME) के विस्तार ने इसमें अहम भूमिका निभाई है. हालांकि, ये आंकड़े सिर्फ STPI में रजिस्टर्ड कंपनियों के हैं. अगर अन्य कंपनियों को भी शामिल किया जाए, तो निर्यात का आंकड़ा और ज्यादा होगा.”
उन्होंने यह भी बताया कि गुजरात की आईटी/आईटीईएस और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) नीतियां निर्यात को और बढ़ावा देंगी और निवेश आकर्षित करेंगी. लेकिन, राज्य को एक मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम और बेहतर टैलेंट पूल विकसित करने की जरूरत है.
बड़ी आईटी कंपनियों की मौजूदगी अभी भी कम
हालांकि गुजरात आईटी सेक्टर में तेजी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन यह अभी भी कर्नाटक, महाराष्ट्र और तेलंगाना जैसे आईटी दिग्गज राज्यों से पीछे है. वित्त वर्ष 2023-24 में:
- कर्नाटक ने 4.09 लाख करोड़ रुपये का आईटी निर्यात किया.
- महाराष्ट्र ने 1.83 लाख करोड़ रुपये का निर्यात किया.
- तेलंगाना का निर्यात 1.21 लाख करोड़ रुपये रहा.
गुजरात को इन राज्यों की बराबरी करने के लिए अभी लंबा सफर तय करना होगा.
गुजरात के आईटी विकास के पीछे के कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड-19 के बाद डिजिटल तकनीकों को अपनाने की रफ्तार बढ़ी, जिससे गुजरात को फायदा हुआ. सरकार की प्रो-इनवेस्टमेंट नीति और बेहतर आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर ने भी इसमें योगदान दिया.
इसके अलावा, रिमोट वर्क और क्लाउड-बेस्ड समाधान की बढ़ती मांग ने कंपनियों को पारंपरिक आईटी हब से बाहर निकलने पर मजबूर किया, और गुजरात ने इस अवसर का भरपूर लाभ उठाया.
सरकार ने आईटी सेक्टर को आगे बढ़ाने के लिए कई योजनाएं लागू की हैं, जिनमें:
- आईटी पार्कों का निर्माण
- डेटा सेंटर्स की स्थापना
व्यवसाय संचालन को आसान बनाने की पहल शामिल हैं.
अहमदाबाद और गांधीनगर बन रहे हैं आईटी हब
अहमदाबाद और गांधीनगर तेजी से आईटी हब के रूप में उभर रहे हैं. यहां न केवल वैश्विक कंपनियां आ रही हैं, बल्कि स्थानीय टेक्नोलॉजी कंपनियां भी तेजी से बढ़ रही हैं.
रायजा ग्रुप के गुजरात प्रमुख पंकज कोटक का कहना है, “आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी है, लेकिन असली बदलाव टैलेंट लाने से होगा. बीते दशक में गुजरात में तकनीकी रूप से कुशल युवाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है. अब यहां से निकलने वाले इंजीनियरों को भी अन्य बड़े आईटी हब के बराबर सैलरी मिल रही है.”
आईटी सेक्टर में गुजरात की उज्जवल भविष्य
गुजरात 90 के दशक की आईटी क्रांति से चूक गया था, लेकिन अब तेजी से प्रगति कर रहा है. यहां आईटी कंपनियों के लिए सहज माहौल है और कोई बड़ी बाधा नजर नहीं आती.
विशेषज्ञों का मानना है कि गुजरात की कम लागत और उच्च जीवन स्तर इसे अन्य मेट्रो शहरों की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाते हैं. यदि टैलेंट पूल और स्टार्टअप कल्चर को और मजबूत किया जाए, तो गुजरात जल्द ही आईटी क्षेत्र में एक बड़ी ताकत बन सकता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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