Bharat Express DD Free Dish

7 चार्ट में: कैसे भारत की GDP सिर्फ 10 साल में 2.1 ट्रिलियन डॉलर से 4.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंची

भारत की GDP पिछले 10 वर्षों में दोगुनी हो गई है, जिससे यह विश्व की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गई है. सरकारी नीतियों, बुनियादी ढांचे में निवेश और डिजिटलीकरण ने इस वृद्धि को संभव बनाया.

india's gdp

पिछले एक दशक में भारत की अर्थव्यवस्था ने जबरदस्त प्रगति की है. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत की GDP 2015 में 2,103.6 अरब डॉलर थी, जो 2025 तक बढ़कर 4,271.9 अरब डॉलर होने का अनुमान है. यह 103.1% की वृद्धि दर्शाता है. 2014 में भारत दुनिया की 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था, लेकिन 2021 में यह 5वें स्थान पर पहुंच गया. IMF का अनुमान है कि 2026 तक भारत जापान को पछाड़कर 4वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा और 2028 तक यह जर्मनी को पीछे छोड़कर 3वें स्थान पर आ जाएगा.

भारत की अर्थव्यवस्था की इस तेज़ वृद्धि के पीछे कई महत्वपूर्ण कारक रहे हैं:

सरकारी नीतियों और सुधारों का योगदान

सरकार द्वारा लागू किए गए प्रमुख सुधारों ने भारत की आर्थिक वृद्धि को गति दी:

  • मेक इन इंडिया और PLI योजना: भारत में विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाएं (PLI) लागू कीं, जिससे उद्योगों को लाभ हुआ.
  • डिजिटल इंडिया और GST: डिजिटल भुगतान, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) और वस्तु एवं सेवा कर (GST) जैसी पहलों ने व्यापार को पारदर्शी और कुशल बनाया.
  • बुनियादी ढांचे में निवेश: सरकार ने सड़कों, रेलवे, बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर भारी निवेश किया, जिससे व्यापार और लॉजिस्टिक्स में सुधार हुआ.

कृषि क्षेत्र की मजबूती

भारत की कृषि अर्थव्यवस्था जलवायु परिवर्तनों के बावजूद स्थिर बनी रही, जिससे ग्रामीण आय में वृद्धि हुई. इससे ग्रामीण मांग बनी रही और उपभोक्ता खर्च को बढ़ावा मिला.

विनिर्माण और निर्यात क्षेत्र में सुधार

भारत में विभिन्न उद्योग वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं का हिस्सा बन गए हैं. विनिर्माण क्षेत्र में सुधार और निर्यात बढ़ाने के लिए नई नीतियों को लागू किया गया. इससे उद्योगों को विस्तार करने और विदेशी निवेश को आकर्षित करने में मदद मिली.

सेवा क्षेत्र का योगदान

भारत का सेवा क्षेत्र, विशेष रूप से आईटी और वित्तीय सेवाएं, GDP का एक प्रमुख घटक बना हुआ है. डिजिटल सेवाओं और स्टार्टअप इकोसिस्टम ने देश की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

बैंकिंग और वित्तीय सुधार

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बैंकों की बैलेंस शीट को मजबूत किया और मनी लॉन्ड्रिंग और बैड लोन की समस्या को नियंत्रित किया. इसके अलावा, मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने में मदद की.

विदेशी निवेश (FDI) में वृद्धि

भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. इससे पूंजी प्रवाह बढ़ा और देश में नई परियोजनाओं को वित्तीय सहायता मिली.

IMF के अनुसार, भारत की GDP 2029 तक 6,307.2 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है. हाल के वर्षों में भारत की GDP वृद्धि दर 9.2% रही है, जिससे यह विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन गया है.

हालांकि, वैश्विक अनिश्चितताओं, व्यापार प्रतिबंधों और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच भारत को अपनी आर्थिक नीतियों को सावधानीपूर्वक प्रबंधित करना होगा ताकि यह उच्च विकास दर बनाए रख सके.

ये भी पढ़ें: Stock Market News: 7 दिन की लगातार तेजी के बाद शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 728 अंक फिसला, निफ्टी 181 अंक लुढ़का

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read