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UNSC में स्थायी सदस्यता के लिए भारत को मिला स्लोवेनिया का साथ, विदेश मंत्री ने दिया बड़ा बयान; जानें

स्लोवेनिया की उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री तान्या फ्यॉन ने UNSC में सुधारों और भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया. उन्होंने भारत-स्लोवेनिया सहयोग, वैश्विक स्थिरता और रक्षा उत्पादन में संभावनाओं पर चर्चा की.

स्लोवेनिया की उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री तान्या फ्यॉन ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों और भारत की स्थायी सदस्यता के लिए मजबूत समर्थन व्यक्त किया. विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ अपनी बैठक के बाद, फ्यॉन ने सुरक्षा परिषद में वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों को प्रतिबिंबित करने की आवश्यकता पर जोर दिया.

फ्यॉन ने पीटीआई वीडियो से बातचीत में कहा, “हम निश्चित रूप से सुरक्षा परिषद में सुधार का समर्थन करते हैं. हमें सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्यों के साथ-साथ स्थायी सदस्यों की संख्या में भी बदलाव लाने की जरूरत है, ताकि यह वर्तमान वैश्विक स्थिति को सही तरीके से दर्शा सके.”

उन्होंने आगे कहा, “अगर सदस्य देशों की संख्या बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया जाता है, तो मुझे नहीं लगता कि भारत को स्थायी सदस्य बनने से कोई रोका सकता है.”

जयशंकर और फ्यॉन की बैठक में वैश्विक मुद्दों पर चर्चा

गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वर्तमान में पांच स्थायी सदस्य हैं— अमेरिका, चीन, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस. भारत कई बार परिषद का अस्थायी सदस्य रह चुका है.

फ्यॉन की भारत यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब स्लोवेनिया जल्द ही UNSC में एक अस्थायी सीट ग्रहण करने वाला है. अपनी बैठक के दौरान, जयशंकर और फ्यॉन ने रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व में अस्थिरता सहित वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की.

आगे फ्यॉन ने कहा, “दुनिया में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए हमें मजबूत सहयोगियों की जरूरत है.”उन्होंने यह भी खुलासा किया कि “हम मई में दिल्ली में राजनीतिक परामर्श आयोजित करेंगे, ताकि यह समझा जा सके कि हम और क्या संभावनाएं तलाश सकते हैं, विशेष रूप से भारत की कंपनियों द्वारा स्लोवेनिया में रक्षा उत्पादन को लेकर.”

फ्यॉन की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ रही है. उन्होंने इस संबंध में आगाह करते हुए कहा, “व्यापार युद्ध किसी भी समाज के लिए लाभकारी नहीं होते और इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था अस्थिर हो सकती है.”

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-भारत एक्सप्रेस 



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