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NCLT Settlement Plan: एस्सेल ग्रुप से जुड़े 22 हजार करोड़ रुपये के कर्ज मामले में अब एक नया मोड़ सामने आया है. दिल्ली NCLT ने हाल ही में सुभाष चंद्रा की ओर से पेश किए गए सेटलमेंट प्लान को मंजूरी दी थी. लेकिन इस फैसले से असंतुष्ट होकर HDFC बैंक और LIC हाउसिंग फाइनेंस (LICHFL) ने विरोध जताया है. दोनों संस्थान अब नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) में अपील करने की तैयारी कर रहे हैं.
NCLT के फैसले पर सवाल
NCLT ने एस्सेल ग्रुप की कंपनियों द्वारा लिए गए 22,006 करोड़ रुपये के कर्ज निपटारे को मंजूरी दी थी. इस प्लान के तहत मुख्य कर्जदारों से 1,494 करोड़ रुपये की वसूली की जा सकती है, जबकि निजी गारंटर के तौर पर सुभाष चंद्रा को केवल 6.25 करोड़ रुपये चुकाने होंगे. इसी बात पर कई बैंकों ने कड़ी आपत्ति जताई है. हालांकि, कमिटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) में शामिल 80.8 फीसदी लेनदारों ने वोटिंग के जरिए इस प्रस्ताव का समर्थन किया था.
किन बैंकों ने जताया विरोध?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में कई सरकारी और निजी बैंकों ने असहमति दर्ज कराई है. इनमें LICHFL, HDFC बैंक, एक्सिस बैंक, केनरा बैंक, RBL बैंक और यूनियन बैंक शामिल हैं. HDFC बैंक ने साफ किया है कि उसने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया था और अब NCLAT में अपील करने पर विचार कर रहा है. वहीं LICHFL ने भी अपील का फैसला किया है और संभव है कि वे नेशनल हाउसिंग बैंक (NHB) से भी दखल देने की मांग करें.
आगे क्या होगा?
LICHFL का कहना है कि 22,006 करोड़ रुपये के भारी-भरकम दावे के बदले लेनदारों को केवल 6.25 करोड़ रुपये देना किसी भी तरह से न्यायसंगत नहीं है. अब सबकी नजरें NCLAT पर हैं कि वह इस मामले में क्या रुख अपनाता है. यह विवाद आने वाले समय में और भी बड़ा रूप ले सकता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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