राजस्थान के धौलपुर में बंद पड़े पंचायत और सामुदायिक भवन अब ‘डिजिटल संविधान घर’ के रूप में नई पहचान पा रहे हैं. जिला प्रशासन की पहल ने इन्हें जीवंत ज्ञान केंद्रों में बदल दिया है, जहां छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और ग्रामीण डिजिटल सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं.
चंद्रज्योति अभियान से शुरू हुआ कार्य
चंद्रज्योति अभियान के तहत शुरू हुई इस पहल का उद्देश्य कम उपयोग में आने वाली सार्वजनिक अवसंरचना को पुनर्जीवित कर समुदाय के स्वामित्व वाले अध्ययन और संवाद केंद्र बनाना है. यहां केवल किताबें ही नहीं, बल्कि कंप्यूटर, इंटरनेट और ऑनलाइन शिक्षण सामग्री भी उपलब्ध है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल अंतर तेजी से कम हो रहा है.
इन केंद्रों की खास बात यह है कि ये सिर्फ लाइब्रेरी नहीं, बल्कि नागरिक जागरूकता के मंच भी हैं. संविधान से जुड़े विषयों पर चर्चा, सरकारी योजनाओं की जानकारी और ऑनलाइन आवेदन जैसी सुविधाएं एक ही स्थान पर मिल रही हैं.
ग्रामीणों को डिजिटल सेवा
महिलाओं की भागीदारी ने इस पहल को और मजबूत बनाया है. स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं ‘संविधान मित्र’ बनकर न सिर्फ केंद्रों का संचालन कर रही हैं, बल्कि अन्य ग्रामीणों को डिजिटल और नागरिक सेवाओं से जोड़ रही हैं.
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कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के सहयोग से अब तक 78 संविधान घर (पहली 28 लाइब्रेरी- SBI CARD, अगली 50 लाइब्रेरी-IIFCL) स्थापित या निर्माणाधीन हैं, जो 50 से अधिक ग्राम पंचायतों और 50,000 से ज्यादा लोगों को लाभ पहुंचा रहे हैं. यह पहल दिखाती है कि सही सोच और सामुदायिक भागीदारी से निष्क्रिय सरकारी भवन भी शिक्षा, सशक्तिकरण और लोकतांत्रिक जागरूकता के मजबूत केंद्र बन सकते हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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