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ICAR ने बदले भर्ती नियम: ‘पर्सनैलिटी’ नहीं ‘परफॉर्मेंस’ दिलाएगी नौकरी, प्रवासियों को मिलेगा खास मौका

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने अपनी भर्ती प्रक्रिया में बड़े बदलाव किए हैं. केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर अब वैज्ञानिकों का चयन केवल इंटरव्यू के आधार पर नहीं, बल्कि पद की योग्यता और ‘स्कोरिंग मॉडल’ के आधार पर होगा.

ICAR Selection Process 2026

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) में अब नौकरी पाना केवल इंटरव्यू में बेहतर प्रदर्शन या अच्छी पर्सनैलिटी का खेल नहीं रह गया है. केंद्र सरकार ने इस संस्थान की पूरी चयन प्रक्रिया का कायाकल्प कर दिया है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में ICAR ने अपने दशकों पुराने ढर्रे को बदलते हुए ऐसे ऐतिहासिक सुधार लागू किए हैं, जिनसे अब केवल सबसे योग्य और पद के लिए फिट उम्मीदवारों का ही चयन हो सकेगा.

इस बड़े बदलाव का सीधा मतलब यह है कि अब वैज्ञानिक का चयन इस आधार पर होगा कि वह उस खास पद की जरूरतों को कितना पूरा करता है, न कि सिर्फ इस आधार पर कि उसका व्यक्तित्व कैसा है.

क्यों पड़ी सुधारों की जरूरत?

अक्सर सरकारी संस्थानों में चयन प्रक्रिया पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन ICAR ने इस बार पारदर्शिता (Transparency) और वैज्ञानिक मानकों को सबसे ऊपर रखा है. महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट के मुताबिक, इन बदलावों की नींव जुलाई 2025 में प्रो. वेद प्रकाश की अध्यक्षता में बनी एक उच्चस्तरीय समिति ने रखी थी. इस समिति का मानना था कि कृषि जैसे तकनीकी क्षेत्र में ‘पद-केंद्रित’ भर्ती (Job-Specific Selection) होना बहुत जरूरी है. यानी अगर किसी पद के लिए विशेष अनुभव की जरूरत है, तो उसे ही सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाएगी.

स्कोरिंग का नया गणित

नए नियमों में सबसे बड़ा बदलाव स्कोरिंग मॉडल में किया गया है. अब लिखित रिकॉर्ड और इंटरव्यू के बीच एक वैज्ञानिक संतुलन बनाया गया है, ताकि किसी भी स्तर पर भेदभाव की गुंजाइश न रहे.

  • मैनेजमेंट लेवल के पद (RMPs): यहां 70% अंक उनके रिकॉर्ड और 30% इंटरव्यू के होंगे.
  • विभाग प्रमुख (Heads/PCs): इनके लिए 75% वेटेज उनके पुराने काम को और 25% इंटरव्यू को दिया गया है.
  • वैज्ञानिक पद: यहां योग्यता को सबसे ज्यादा यानी 80% महत्व दिया गया है, जबकि इंटरव्यू मात्र 20% का होगा.

अब केवल शोध पत्रों (Research Papers) की संख्या गिनकर वैज्ञानिक नहीं चुना जाएगा. अब यह देखा जाएगा कि उनके काम का प्रभाव (H-Index) कितना है, उनमें लीडरशिप क्वालिटी कैसी है और क्या वे मुश्किल परिस्थितियों में काम करने का दम रखते हैं? दुर्गम और पिछड़े क्षेत्रों में सेवा देने वाले वैज्ञानिकों को इस बार विशेष ‘वेटेज’ देने का भी प्रावधान है.

विदेशी प्रतिभाओं के लिए भी खुले दरवाजे

ICAR ने अपनी सीमाओं को बढ़ाते हुए अब भारतीय प्रवासी वैज्ञानिकों और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों को भी इस प्रक्रिया में शामिल होने का मौका दिया है. इसका उद्देश्य वैश्विक स्तर की प्रतिभा को भारत की मिट्टी से जोड़ना है. चयन प्रक्रिया में कोई मानवीय चूक न हो, इसके लिए इंटरव्यू लेने वालों को विशेष ट्रेनिंग दी गई है और उम्मीदवारों का ‘साइकोमेट्रिक’ मूल्यांकन भी किया जा रहा है.

क्या होगा इसका असर?

इस पूरे सुधार का असली मकसद केवल भर्तियां करना नहीं, बल्कि संस्थान की कार्यसंस्कृति को बदलना है. डॉ. जाट का कहना है कि अब ICAR का ध्यान ‘किसान-केंद्रित’ और ‘स्टार्टअप-उन्मुख’ शोध पर होगा. जब सही पद पर सही काबिलियत वाला इंसान बैठेगा, तो कृषि अनुसंधान का सीधा फायदा खेतों तक और छोटे एग्री-स्टार्टअप्स तक पहुंचेगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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