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नीट में असफलता के बाद बदली किस्मत, 21 साल की शुभांगी ने एक साथ हासिल की 5 सरकारी नौकरियां

शहडोल जिले की रहने वाली 21 वर्षीय शुभांगी मिश्रा ने सीमित संसाधनों और बिना किसी महंगी कोचिंग के घर पर पढ़ाई करके एक साथ पांच प्रतिष्ठित सरकारी परीक्षाएं पास कर ली हैं. उनकी यह सफलता देश के लाखों युवाओं के लिए एक मिसाल बन गई है.

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Shubhangi Mishra Success Story: आज के दौर में जहां एक तरफ प्रतियोगी परीक्षाओं और पेपर लीक जैसी खबरों को लेकर छात्रों में मायूसियां और गुस्सा देखने को मिलता है वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसी कमाल की कहानियां भी सामने आती हैं जो दिल में एक नई उम्मीद जगा देती हैं. मध्य प्रदेश के शहडोल से एक ऐसी ही बेटी की कहानी इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई है, जिसने बिना किसी महंगी कोचिंग या बड़े शहरों की चकाचौंध के दम पर वो कर दिखाया, जिस पर एक बार तो यकीन करना भी मुश्किल हो जाए.

कौन हैं शुभांगी मिश्रा?

उमरिया जिले के शाहपुर गांव की रहने वाली महज 21 साल की शुभांगी मिश्रा ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर एक साथ पांच सरकारी नौकरियों की परीक्षाएं पास कर डाली हैं. उनके पिता श्याम कुमार मिश्रा शहडोल पुलिस जोन कार्यालय में हेड कांस्टेबल के पद पर सेवाएं दे रहे हैं. घर का माहौल सामान्य था लेकिन सपने बड़े थे.

NEET में असफलता के बाद बदला रुख

शुरुआत में शुभांगी का सपना डॉक्टर बनने का था. उन्होंने 12वीं के बाद पूरी शिद्दत से देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली NEET परीक्षा की तैयारी की. पहले प्रयास में उन्होंने 400 और दूसरे प्रयास में बेहतरीन 570 अंक हासिल किए लेकिन इसके बावजूद उन्हें MBBS की सरकारी सीट नहीं मिल पाई. किसी भी युवा के लिए यह दौर टूटने वाला हो सकता था लेकिन शुभांगी ने हार मानने के बजाय अपनी दिशा बदलने का फैसला किया.

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सेल्फ स्टडी को बनाया अपना गुरु

बड़े-बड़े शहरों के महंगे कोचिंग संस्थानों में जाकर पढ़ाई करने के बजाय शुभांगी ने घर पर रहकर ही तैयारी करने की ठानी. उन्होंने इंटरनेट, यूट्यूब और ऑनलाइन स्टडी को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया. रोजाना 8 से 10 घंटे की कड़ी मेहनत और पक्का अनुशासन उनकी रोजाना की आदत बन गया.

उनकी इस लगन का नतीजा यह निकला कि एक के बाद एक परीक्षाओं के रिजल्ट उनके पक्ष में आने लगे. शुभांगी का चयन मध्य प्रदेश पुलिस कांस्टेबल, एसएससी स्टेनोग्राफर, एमपी पुलिस सब-इंस्पेक्टर (SI), एएसआई (स्टेनो) और सूबेदार जैसे पांच बड़े और प्रतिष्ठित पदों पर हो गया. फिलहाल वह आरक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं लेकिन उनका असली लक्ष्य यहीं नहीं रुकता. वह आगे चलकर सिविल सेवा (UPSC) में जाकर देश की सेवा करना चाहती हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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