Bharat Express DD Free Dish

इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: UP पुलिस सब-इंस्पेक्टर भर्ती प्रक्रिया पर लगी रोक हटी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस एसआई भर्ती 2025 की फाइनल आंसर की को चुनौती देने वाली सभी 22 याचिकाएं खारिज कर दी हैं. कोर्ट के फैसले से अब सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देने का रास्ता साफ हो गया है.

UP Police SI Recruitment 2025 Allahabad High Court Dismisses Petitions Answer Key

AI IMAGE

उत्तर प्रदेश पुलिस में सब-इंस्पेक्टर और समकक्ष पदों की सीधी भर्ती परीक्षा 2025 की अंतिम उत्तर कुंजी (Final Answer Key) को चुनौती देने वाले अभ्यर्थियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. अदालत ने प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी या अवैधता से इनकार करते हुए इससे जुड़ीं सभी 22 याचिकाओं को एक साथ खारिज कर दिया है. न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की एकल पीठ ने श्याम सुंदर व अन्य याचिकाकर्ताओं की अर्जी पर सुनवाई करते हुए यह अहम फैसला सुनाया.

याचिकाओं के खारिज होने के साथ ही सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी करने पर लगी रोक हट गई है और भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है.

अदालत में क्या थीं याचिकाकर्ताओं की दलीलें?

उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने 4,543 पदों के लिए यह परीक्षा मार्च 2026 में आयोजित की थी. इसके बाद 7 मई 2026 को अंतिम उत्तर कुंजी जारी कर करीब 12,333 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया था. दस्तावेज सत्यापन और शारीरिक परीक्षा के बाद 14 जुलाई 2026 को अंतिम परिणाम जारी हुआ, जिसमें असफल रहे अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का रुख किया.

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि बोर्ड ने फाइनल आंसर की में कई उत्तर बदल दिए, लेकिन अभ्यर्थियों को उन पर दोबारा आपत्ति दर्ज कराने का कोई मौका नहीं दिया. साथ ही, कुछ प्रश्नों के उत्तरों पर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के पुराने फैसलों का हवाला भी दिया गया.

हाईकोर्ट ने क्यों खारिज कीं याचिकाएं?

अदालत ने दोबारा आपत्ति का मौका न दिए जाने की दलील को पूरी तरह से बेबुनियाद करार दिया. कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अगर हर उत्तर कुंजी पर बार-बार आपत्तियां मांगी गईं, तो चयन प्रक्रिया कभी पूरी ही नहीं हो पाएगी और परिणाम कभी अंतिम रूप नहीं ले सकेगा.

न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि किसी भी प्रश्न के उत्तर पर विशेषज्ञों की राय अलग-अलग हो सकती है. ऐसे में परीक्षा आयोजित करने वाले बोर्ड को ही अंतिम फैसला लेने का अधिकार है. इसके अलावा, याचिकाकर्ता बोर्ड पर किसी भी तरह के पक्षपात या बदनीयती का आरोप लगाने में असमर्थ रहे.

यह भी पढ़ें: अघोषित इमरजेंसी या तानाशाही? जानिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय गृह सचिव और दिल्ली पुलिस कमिश्नर से क्यों मांगा जवाब?

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read