Bihar Election 2025: बिहार में चुनावी माहौल पूरी तरह गर्म है और हर बार की तरह इस बार भी बाहुबल और धनबल का बोलबाला साफ नजर आ रहा है. इसी बीच मोकामा के चर्चित नेता अनंत कुमार सिंह, जिन्हें लोग ‘छोटे सरकार’ के नाम से जानते हैं वो एक बार फिर सुर्खियों में हैं. जनसुराज कार्यकर्ता दुलारचंद यादव की हत्या के बाद पुलिस ने अनंत सिंह को गिरफ्तार कर लिया है जिससे उनकी पुरानी क्राइम कुंडली फिर से चर्चा में आ गई है.
छोटे सरकार की क्राइम कुंड
अनंत सिंह JDU के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन उनकी पहचान किसी पार्टी से ज्यादा उनकी दबंग छवि से जुड़ी है. सफेद कपड़े, धूप का चश्मा और बेबाक अंदाज में बयान देना उनकी पहचान बन चुकी है. सोशल मीडिया पर उनके वीडियो और मीम्स खूब वायरल होते हैं लेकिन उनके खिलाफ दर्ज मामलों की लिस्ट भी लंबी है. हत्या, अपहरण, षड्यंत्र, हथियार रखने से लेकर अपराधियों को शरण देने तक के 28 केस उनके नाम हैं. वे पहले भी कई बार जेल जा चुके हैं.
मोकामा की राजनीति में अनंत सिंह का दबदबा
मोकामा की राजनीति में अनंत सिंह का दबदबा पिछले दो दशकों से बना हुआ है. चाहे JDU हो, RJD या निर्दलीय हो उन्होंने हर बार जीत हासिल की है. 2005 से शुरू हुआ उनका राजनीतिक सफर कई मोड़ों से गुजरा लेकिन मोकामा की सीट उनके पास ही रही. 2022 में हथियार मामले में दोषी पाए जाने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता चली गई लेकिन उनकी पत्नी नीलम देवी ने RJD से चुनाव जीतकर सीट बरकरार रखी.
कितनी संपत्ति के मालिक हैं अनंत सिंह
नामांकन में दिए गए हलफनामे के मुताबिक अनंत सिंह के पास 37.88 करोड़ की संपत्ति है, जिसमें 13 करोड़ की चल संपत्ति और कई महंगी गाड़ियां शामिल हैं. उनके पास एक हाथी, घोड़ा और मवेशी भी हैं. वहीं उनकी पत्नी के पास 62.72 करोड़ की संपत्ति है.
दुलारचंद सिंह यादव हत्याकांड
अब बात करें दुलारचंद सिंह यादव हत्याकांड की, तो गुरुवार को मोकामा में उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. वे जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार के लिए प्रचार कर रहे थे हालांकि प्रशांत किशोर ने उनके पार्टी से संबंध से इनकार किया है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि उनके दिल और फेफड़ों पर किसी कठोर चीज से चोट पहुंची थी, जिससे उनकी मौत हुई. इस मामले में अनंत सिंह समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
बिहार चुनाव में बाहुबल और राजनीति का यह मेल एक बार फिर चर्चा में है और मोकामा की सीट इस बार भी सबकी नजरों में बनी हुई है. जनता अब देख रही है कि इस बार किसका पलड़ा भारी रहेगा, कानून का या बाहुबल का.
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-भारत एक्सप्रेस
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