वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी की खबर के बाद दुनिया भर में हलचल है. इसी बीच सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि अमेरिका ने उन्हें बेहद क्रूर तरीके से हिरासत में लिया. लेकिन क्या ये वीडियो सच में उसी कार्रवाई की है, या फिर गिरफ्तारी की सच्ची खबर के नाम पर लोगों को गुमराह किया जा रहा है? आइए जानते है वायरल वीडियो का सच.
वायरल दावे की शुरुआत कहां से हुई?
दरअसल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के एक यूजर ने दो अलग-अलग वीडियो शेयर किए. एक वीडियो में अमेरिकी सैनिकों को बोइंग चिनूक हेलिकॉप्टर से किसी इमारत की छत पर उतरते और ऑपरेशन चलाते हुए दिखाया गया.

दूसरे वीडियो में अमेरिकी सैनिकों को वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति को हिरासत में लेते हुए दिखाने का दावा किया गया. वहीं, कई पोस्ट्स में ये भी कहा गया कि अमेरिका ने तेल नीति से नाराज होकर सीधे राष्ट्रपति को ही “अरेस्ट” कर लिया.
जांच में क्या सामने आया?
हमारी भारत एक्सप्रेस की फैक्ट चेक टीम ने जब इस वीडियो की जांच की. जांच में पता चला कि पहला वीडियो किसी असली सैन्य कार्रवाई का नहीं, बल्कि अमेरिकी सेना के एक पुराने सैन्य अभ्यास का है. टीम के रिवर्स इमेज सर्च करने पर यही वीडियो जून 2025 में एक वेरिफाइड एक्स हैंडल से पोस्ट किया हुआ मिला. साथ ही, जांच में मिली जानकारी के अनुसार, यह फूटेज अप्रैल 2024 में फोर्ट लिबर्टी, नॉर्थ कैरोलिना में हुए अमेरिकी आर्मी स्पेशल ऑपरेशंस कमांड के अभ्यास का है. यानी इसका वेनेजुएला या किसी हाल ही के ऑपरेशन से कोई लेना-देना नहीं.
वहीं, दूसरा वीडियो जिसमें राष्ट्रपति मादुरो को इतनी क्रुरता के साथ पकड़े जाने का दावा किया गया है, वह पूरी तरह एआई से तैयार किया गया है. जांच में सामने आया कि इस फुटेज का शुरुआती हिस्सा 100 फीसदी एआई-जनरेटेड है. न तो इसमें कोई असली या प्रमाणिक दृश्य मिला और न ही किसी आधिकारिक स्रोत से इसकी पुष्टि हुई. गूगल के SynthID और अन्य एआई डिटेक्शन टूल्स ने भी इसमें डिजिटल छेड़छाड़ की पुष्टि की है.
क्या कहती है आधिकारिक जानकारी?
बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 3 जनवरी 2026 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वेनेजुएला को लेकर बयान जरूर दिया था, लेकिन पूरे सैन्य ऑपरेशन का कोई भी वीडियो सार्वजनिक नहीं किया गया था. व्हाइट हाउस की ओर से सिर्फ कुछ तस्वीरें जारी की गईं, जिनमें Nicolás Maduro को अमेरिकी नौसेना के जहाज पर दिखाया गया. वहीं, सुरक्षा कारणों से ऑपरेशन के विस्तृत वीडियो जारी न किए जाने की बात खुद अमेरिकी प्रशासन ने कही.
बता दें कि इस पूरे घटनाक्रम पर दुनिया भर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आईं. रूस और चीन ने इसे संप्रभुता का उल्लंघन बताया, जबकि ब्रिटेन ने साफ कहा कि उसकी इसमें कोई भूमिका नहीं है. अर्जेंटीना ने अमेरिकी कदम का समर्थन किया.
ये सच है वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिका द्वार गिरफ्तार किया गया है. हालांकि तमाम प्रतिक्रियाओं के बीच मादूरो की इस क्रुरता के साथ गिरफ्तारी के वायरल वीडियो की सच्चाई यही है कि वो भ्रामक हैं. ‘ऑपरेशन एब्सॉल्यूट रिजॉल्व’ के नाम से जो वीडियो वायरल हो रहे हैं, वे या तो पुराने सैन्य अभ्यास के फुटेज हैं या फिर एआई की मदद से बनाए गए नकली दृश्य. ऐसे में सोशल मीडिया पर दिखने वाली हर सनसनीखेज क्लिप को सच मानने से पहले ठहरकर उसकी पड़ताल करना बेहद जरूरी है, वरना अफवाहें ही सच बनकर फैलती रहेंगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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