पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही सोशल मीडिया पर दावों और प्रति-दावों का दौर शुरू हो गया है. ताजा मामला एक वायरल वीडियो से जुड़ा है, जिसमें कुछ लोग एक शख्स को लाठी-डंडों से दौड़ा-दौड़ा कर पीटते हुए नजर आ रहे हैं. दावा किया जा रहा है कि मार खा रहा ये व्यक्ति टीएमसी का कार्यकर्ता ‘नजरुल इस्लाम’ है, जो मुर्शिदाबाद में हिंदू समुदाय के लोगों को वोट देने के नाम पर धमका रहा था और फिर स्थानीय लोगों ने उसकी जमकर धुनाई कर दी. लेकिन जब हमने इस वीडियो की तहकीकात की, तो हकीकत कुछ और ही निकली.
सोशल मीडिया पर क्या हो रहा है वायरल?
दरअसल, एक्स और फेसबुक पर इस वीडियो को पोस्ट करते हुए दावे कर रहे है. एक यूजर ने वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा कि ये नजरुल इस्लाम है जो TMC के लिए काम करता है और मुर्शिदाबाद में हिंदुओं को धमका रहा था, जिसके बाद हिंदुओं का ‘ईमान’ जागा और उसे सबक सिखाया गया.

वहीं, वीडियो के साथ ‘हर हर महादेव’ जैसे नारे भी लिखे गए हैं ताकि इसे बंगाल चुनाव से जोड़कर सनसनी फैलाई जा सके. चुनाव के समय ऐसे वीडियो मतदाताओं के ध्रुवीकरण का काम करते हैं, इसलिए इसका सच जानना बेहद जरूरी हो गया था.
पड़ताल में खुली पोल
जब इस वीडियो के की-फ्रेम्स को निकालकर रिवर्स इमेज सर्च किया गया, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए. ये वीडियो न तो पश्चिम बंगाल का है और न ही इसका किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता से कोई लेना-देना है.
दरअसल, ये वीडियो उत्तर प्रदेश के बनारस का है और करीब चार साल पुराना है. जून 2022 में जब केंद्र सरकार की ‘अग्निपथ’ योजना के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे थे, तब वाराणसी में भी प्रदर्शनकारियों और स्थानीय दुकानदारों के बीच हिंसक झड़प हुई थी.
वीडियो को ध्यान से देखने पर वहां लगे एक साइनबोर्ड पर ‘टेलीफोन कॉलोनी, नगर निगम वाराणसी’ लिखा हुआ साफ नजर आता है. गूगल मैप्स के स्ट्रीट व्यू से भी इस बात की पुष्टि हो गई कि ये घटना बनारस के कैंट रेलवे स्टेशन के पास की है.
बता दें कि उस समय अग्निपथ योजना का विरोध कर रहे कुछ युवक जबरन दुकानें बंद कराने की कोशिश कर रहे थे, जिससे नाराज होकर स्थानीय दुकानदारों ने उन्हें पकड़ लिया और उनकी पिटाई कर दी थी. साथ ही कई प्रमुख मीडिया रिपोर्ट्स में भी जून 2022 की इस घटना का पूरा ब्यौरा मौजूद है.
भ्रामक दावों से रहें सावधान
जांच में ये पूरी तरह साफ हो गया कि मुर्शिदाबाद में टीएमसी कार्यकर्ता की पिटाई का दावा पूरी तरह फर्जी और मनगढ़ंत है. 2022 के अग्निपथ विरोध प्रदर्शन के एक वीडियो को बंगाल चुनाव के दौरान सांप्रदायिक रंग देकर शेयर किया जा रहा है. हमारी पड़ताल में नजरुल इस्लाम नाम के किसी टीएमसी कार्यकर्ता के साथ मुर्शिदाबाद में ऐसी किसी घटना की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
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-भारत एक्सप्रेस
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