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Fact Check: अलर्ट रहो लेह वालों! क्या गृह मंत्री ने दिया था सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी का आदेश? जानें एडीसी के वीडियो की सच्चाई

अक्सर ही सोशल मीडिया पर डीपफेक वीडियो शेयर और वायरल होते रहते है. लेकिन अब ये केवल आम लोगों तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि प्रशासनिक आधिकारियों तक पहुंच गया है. इन वीडियो का मकसद केवल भ्रम और झूठ फैलाना होता है.

Fact Check: अक्सर ही सोशल मीडिया पर डीपफेक वीडियो शेयर और वायरल होते रहते है. लेकिन अब ये केवल आम लोगों तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि प्रशासनिक आधिकारियों तक पहुंच गया है. इन वीडियो का मकसद केवल भ्रम और झूठ फैलाना होता है. कुछ इसी तरीके का वीडियो लद्दाख हिंसा के बाद सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी को लेकर वायरल हो रहा है. हालांकि जांच में इसे फेक पाया गया है.

किया गया दावा सच या झूठ?

दरअसल सोशल मीडिया पर फैल रही गलत जानकारी के खिलाफ PIB ने कड़ा रुख अपनाते हुए वायरल हो रहे एक वीडियो का फैक्ट चेक जारी किया है. यह वीडियो लेह के अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर गुलाम मोहम्मद का था, जिसको डिजिटली तौर पर बदलकर झूठे दावों के साथ प्रसारित किया गया. झूठे वीडियो के जरिए दावा किया गया कि पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर हुई है.


AI द्वारा छेड़छाड़ किए गए इस वीडियो में ADC को यह कहते हुए दिखाया गया है कि वांगचुक की गिरफ्तारी गृह मंत्रालय के आदेश पर हुई थी. PIB की फैक्ट चेक यूनिट ने साफ किया कि ADC लेह ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया और यह एक डीपफेक वीडियो है. इसे केवल जनता को गुमराह करने और दहशत फैलाने के उद्देश्य से बनाया गया है.

PIB ने जनता से किया अपील

PIB ने सावधान करते हुए नागरिकों से अपील की है कि किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी जांच करें और इस प्रकार की भ्रामक सामग्री की सूचना संबंधित अधिकारियों को दें. आपको बता दें कि यह वीडियो 26 सितंबर को आया जब लद्दाख को छठी अनुसूची के तहत विशेष दर्जा और राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तार किया गया था. इस हिंसा में 4 लोगों क मौत हो गई थी और 90 लोग घायल हुए थे.

हालांकि यह पहली बार नहीं है जब किसी अधिकारी को इस तरीके से निशाना बनाया गया हो. इसके पहले भी एक बार लद्दाक के डीजीपी एस.डी. सिंह जम्वाल का भी झूठे बयान के साथ एआई जेनरेटेड वीडियो बनाकर फैलाया गया था. उस वीडियो में दावा किया गया था कि वांगचुक की गिरफ्तारी रक्षा मंत्री के आदेश पर हुई थी, जिसे PIB ने खारिज कर दिया था. लेह पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत FIR दर्ज की थी.

गलत इस्तेमाल से लोकतंत्र को खतरा

ऐसे वीडियो से यह पता चलता है कि कैसे डिजिटल तकनीक का गलत इस्तेमाल कर सार्वजनिक संवादों को तोड़ मरोड़ कर लोगों के मन में संस्थाओं के प्रति विश्वास को कमजोर किया जा सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी तकनीकों से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को खतरा है, खासकर जब ये संवेदनशील राजनीतिक माहौल में झूठे बयान गढ़ने के लिए इस्तेमाल की जाए.

लेह प्रशासन ने शांति और पारदर्शिता बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है और जनता से अपील की है कि वे बिना पुष्टि किए किसी भी सामग्री को साझा न करें. इसी बीच नागरिक समाज संगठन वांगचुक की रिहाई और लद्दाख की राजनीतिक मांगों के शांतिपूर्ण समाधान की मांग हो रही है.

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-भारत एक्सप्रेस



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