हाल ही में आए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए नियमों को लेकर हर जगह छात्रों ने प्रदर्शन किए. इसको देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने UGC के इन नए नियमों को अस्पष्ट और भेदभाव की परिभाषा पर सवाल उठाते हुए उनपर रोक लगा दी. लेकिन इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है. इस वीडियो में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सीएम योगी को देखा जा सकता है, जिसमें दोनों मिठाई खा रहे है. अब इस वीडियो को शेयर करते हुए यूजर्स दावा कर रहे है कि यूजीसी पर रोक लगने के बाद दोनों लोग जलेबी पार्टी कर रहे है. लेकिन सवाल ये ही है कि क्या ऐसा वाकई में है. आइए जानते है.
क्या है वायरल दावा?
दरअसल, 29 जनवरी 2026 को एक इंस्टाग्राम यूजर ने इस वीडियो को शेयर करते हुए वीडियो के Thumb और कैप्शन में लिखा, ‘UGC Remove. जलेबी’.

अब इसी दावे के साथ अन्य यूजर भी इस वीडियो को सोशल मीडियो पर आगे शेयर कर रहे है.
क्या है वीडियो का सच?
दावे की गंभीरता को देखते हुए हमने इसकी जांच शुरू की. वीडियो के कीफ्रेम्स को निकालकर गूगल लेंस पर सर्च करने पर हमें एक्स का एक पोस्ट मिलता है, जिसके साथ वायरल वीडियो भी अपलोडेड होता है. यूजर ने इसे 1 जनवरी 2026 को पोस्ट किया था और उस समय तक UGC को लेकर कोई मुद्दा आया ही नहीं था. इससे ये साफ हो जाता है कि वायरल हो रहा वीडियो पुराना है.
वहीं पोस्ट में चूजर ने ये भी लिखा था कि अयोध्या दौरे पर पहुंचे थे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन किया. दर्शन के उपरांत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खिलाई जलेबी.
इसके साथ ही एक प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान ने भी इसे 1 जनवरी को अपने फेसबुक पेज पर अपलोड किया था, जिसमें उसने वीडियो को अयोध्या का बताया था.
इसके साथ ही एक इंस्टा यूजर ने 31 दिसंबर 2025 को इसी वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, ‘आज अयोध्या धाम स्थित पावन श्री हनुमानगढ़ी में राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ ने विधिवत दर्शन-पूजन किया. इसके बाद दोनों पूज्य आश्रम पधारे. इस पावन अवसर पर श्री श्री 1008 महंत राजू दास जी महाराज और हनुमानगढ़ी अयोध्या (राष्ट्रीय अध्यक्ष, हिन्दू सुरक्षा सेवा संघ) ने दोनों को गदा एवं श्री हनुमान जी महाराज की भव्य प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया.’
वहीं, आयोध्या में पूजा-अर्चना के कार्यक्रम को विश्वसनीय यूट्यूब चैनल पर भी मिला जिसमें राजनाथ सिंह और योगी आदित्यनाथ दोनों लोग मौजूद थे.
इस जांच से ये साफ हो जाता है कि वा.रल हो रहा दावा भ्रामक और झूठा है. इसलिए ऐसे किसी भी दावे पर विश्वास करने से पहले एक बार उसकी पुष्टि किसी विश्वसनीय स्रोत से जरूर करें
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-भारत एक्सप्रेस
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