150 Years of Vande Mataram: लंदन में भारतीय उच्चायोग ने भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक भव्य समारोह का आयोजन किया. 7 नवंबर को इंडिया हाउस में हुए इस विशेष कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति, कला और देशभक्ति की अनोखी झलक देखने को मिली.
A soulful recital of the complete #VandeMataram by @GWR holder Siddhiie Kapshikarr, a graceful Bharatanatyam performance by students of Lingeshwara Natyalaya, captivating Kathak performances by Nipra Wamanker and Oorja Akshara from King’s College, and a moving semi-classical duet… pic.twitter.com/Mg4he55iN9
— India in the UK (@HCI_London) November 9, 2025
कार्यक्रम की शुरुआत भारत के उच्चायुक्त विक्रम दोराईस्वामी के भाषण से हुई. उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह गीत भारत की “एकता, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता” का प्रतीक है. उन्होंने बताया कि इस गीत का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना स्वतंत्रता संग्राम के दौरान था. यह हर भारतीय को ईमानदारी से काम करने, नवाचार करने और देश के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देता है.

भारतीय नृत्य और संगीत से सजा समारोह
कार्यक्रम में भारतीय कला और संस्कृति की झलक भी देखने को मिली. गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड धारक सिद्धि कपशिकर ने पूरे ‘वंदे मातरम्’ का दिल छू लेने वाला गायन किया, जिसे सुनने वालो ने खड़े होकर सराहा. इसके बाद लिंगेश्वर नाट्यालय की छात्राओं ने शानदार भरतनाट्यम प्रस्तुति दी.

किंग्स कॉलेज कि ऊर्जा अक्षरा और निप्रा वामनकर को किया गया सम्मानित
किंग्स कॉलेज लंदन की नृत्यांगना निप्रा वामनकर और ऊर्जा अक्षरा ने अपने सुंदर कथक प्रदर्शन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, जबकि कलाकार चिनू किशोर और श्रेयशी देब रॉय ने सत्रिया और ओडिसी नृत्य शैलियों का मिश्रण कर एक सुंदर मिश्रण तैयार किया जो भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक था।

‘वंदे मातरम्’ की कहानी
बता दें कि भारत का राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ वर्ष 1875 में महान कवि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने संस्कृत और बंगला भाषा में लिखा था. बाद में यह गीत उनकी प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया गया. अंग्रेजी शासन के खिलाफ यह गीत स्वतंत्रता सेनानियों के लिए एक युद्धनाद बन गया था. “वंदे मातरम्” का अर्थ है “मां, तुम्हें प्रणाम” और यह भारत माता के प्रति समर्पण, प्रेम और गर्व की भावना का प्रतीक है.
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– भारत एक्सप्रेस
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