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बिहार के नालंदा में मिड-डे मील खाने से 60 बच्चे बीमार, पीड़ित छात्रों को रेफरल अस्पताल पहुंचाया गया

जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) राजकुमार ने बताया कि यह पता लगाने के लिए जांच चल रही है कि समस्या खराब भोजन की गुणवत्ता या तैयारी में लापरवाही की वजह से हुई है. शिक्षा विभाग ने आश्वासन दिया है कि भोजन की तैयारी और वितरण में लापरवाही को खत्म करने के लिए निगरानी प्रक्रियाओं को कड़ा किया जाएगा.

Nalanda Mid Day Meal Incident: बिहार के नालंदा के हरनौत प्रखंड के श्री चांदपुर प्राथमिक विद्यालय में शुक्रवार को मध्याह्न भोजन खाने से करीब 60 छात्र बीमार पड़ गए. मीड डे मील खाने के करीब दो घंटे बाद छात्रों ने पेट दर्द और उल्टी की शिकायत की. छात्रों को संदेह है कि दोपहर के भोजन में परोसे गए उबले अंडे की वजह से उन्हें बीमारी हुई है.

सूचना मिलने पर स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी स्कूल पहुंचे और पीड़ित छात्रों को कल्याण विघा रेफरल अस्पताल पहुंचाया. छात्रों का इलाज कर रही टीम का नेतृत्व करने वाले डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह ने पुष्टि की कि छात्र ठीक हो रहे हैं. बीपीएम मनीष कुमार ने बताया कि 25 छात्रों को छुट्टी दे दी गई है, जबकि शेष को जल्द ही घर भेज दिया जाएगा.

भोजन के नमूने परीक्षण के लिए लैब भेजे गए

जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) राजकुमार ने बताया कि यह पता लगाने के लिए जांच चल रही है कि समस्या खराब भोजन की गुणवत्ता या तैयारी में लापरवाही की वजह से हुई है. शिक्षा विभाग ने आश्वासन दिया है कि भोजन की तैयारी और वितरण में लापरवाही को खत्म करने के लिए निगरानी प्रक्रियाओं को कड़ा किया जाएगा.

डीईओ राजकुमार ने कहा कि भोजन के नमूने परीक्षण के लिए प्रयोगशाला में भेजे गए हैं और जिम्मेदार पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाए जाएंगे.

घटना से अभिभावकों में चिंता

स्कूली बच्चों को पोषण संबंधी सहायता देने के लिए मिड-डे मील कार्यक्रम बहुत महत्वपूर्ण है और इस तरह की घटनाएं सरकारी स्कूलों में खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करती हैं. इस घटना के बाद, अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों ने सरकारी स्कूलों में दिए जाने वाले मिड-डे मील की गुणवत्ता को लेकर गंभीर चिंता जताई है.

अभिभावकों का कहना है कि बच्चों के स्वास्थ्य से समझौता नहीं किया जा सकता. उन्होंने अधिकारियों से स्कूलों में परोसे जाने वाले भोजन की नियमित गुणवत्ता जांच करने का आग्रह किया है. उन्होंने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने और बच्चों को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन मिले, यह सुनिश्चित करने के लिए सख्त निगरानी की भी मांग की है.

जिला प्रशासन ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है और अधिकारियों को मिड-डे मील (एमडीएम) योजना की निगरानी को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं.

-भारत एक्सप्रेस



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