Bharat Express DD Free Dish
Pension Mission Shakti Digital
Pension Mission Shakti Digital

गुजराती में आदि शंकराचार्य की ग्रंथावली का विमोचन, अमित शाह बोले-युवाओं के लिए अमूल्य खजाना’

अहमदाबाद में अमित शाह ने आदि शंकराचार्य की गुजराती ग्रंथावली का विमोचन किया. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि संस्कृत का यह ज्ञानसागर अब गुजराती युवाओं के लिए मार्गदर्शक बनेगा.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अहमदाबाद में आदि शंकराचार्य की गुजराती ग्रंथावली का विमोचन किया. उन्होंने कहा कि यह ग्रंथावली गुजरात के युवाओं के लिए बहुत बड़ा खजाना है. शंकराचार्य जी (Adi Shankaracharya) का संस्कृत में रचित ज्ञानसागर अब गुजराती में उपलब्ध है. आने वाले सालों में अच्छे साहित्य की चर्चा में यह शामिल होगा. मुद्रण करने वाले ‘सस्तु साहित्य मुद्रणालय ट्रस्ट’ का यह प्रयास काफी सराहनीय है. इसके अलावा उन्होंने स्वामी अखंडानंद जी के जीवन और योगदान की भी प्रशंसा की.

आदि शंकराचार्य का ज्ञानसागर अब गुजराती में

अमित शाह ने आदि शंकराचार्य के ज्ञानसागर को गुजराती युवाओं के लिए बड़ी बात बताया. उन्होंने कहा कि गुजराती भाषा में प्रकाशित यह ग्रंथावली युवाओं के लिए बहुत बड़ा खजाना है. आने वाले वर्षों में अच्छे साहित्य की चर्चा में ‘सस्तु साहित्य मुद्रणालय ट्रस्ट’ का यह प्रयास शामिल होगा. आदि शंकराचार्य ने सनातन धर्म के सार को सरल तरीके से प्रस्तुत किया और उनकी व्याख्या आज भी प्रासंगिक है.

 

यह भी पढ़ें: गृह मंत्री अमित शाह वादे पर खरे उतरे: छत्तीसगढ़ में अब तक 2 हजार से ज्यादा नक्सली कर चुके सरेंडर, आज 52 माओवादियों ने हथियार डाले

स्वामी अखंडानंद जी का भी किया जिक्र

देश के गृह मंत्री ने स्वामी अखंडानंद जी के जीवन की प्रशंसा करते हुए यह भी कहा कि स्वामी अखंडानंद जी ने अपना जीवन आयुर्वेद, सनातन धर्म और समाज के लिए दिया. लोगों ने उनके नाम में ‘भिक्षु’ जोड़ दिया. उन्होंने गुजराती युवाओं को किफायती साहित्य उपलब्ध कराने की परिकल्पना की. एक बड़ी संस्था स्थापित की. श्रीमद्भगवद्गीता, महाभारत, रामायण, योग वशिष्ठ, स्वामी रामतीर्थ के उपदेश, रामकथामृत और नीति ग्रंथ प्रकाशित किए. कौटिल्य के अर्थशास्त्र सहित कई महत्वपूर्ण ग्रंथ गुजराती में उपलब्ध कराए.

आदि शंकराचार्य की व्याख्या कर क्या बोले?

अमित शाह ने कहा कि ज्ञान का कभी अंत नहीं होता. ज्ञान हमेशा आगे बढ़ता रहता है. इस सृष्टि पर अब तक जितना ज्ञान है उसमें “शिवोऽहम्” से बढ़कर कुछ नहीं है. इतनी सरल, सटीक और सत्य के निकट उपनिषदों की व्याख्या कोई नहीं दे सकता. यह कार्य केवल आदि शंकराचार्य ही कर सकते थे. ढेर सारी कुरीतियां आने से सनातन धर्म पर आशंकाएं उत्पन्न हुई थीं. वहीं आदि शंकराचार्य ने अपने जीवनकाल में ही इन आशंकाओं का निराकरण कर दिया.

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Pension Mission Shakti Digital