Amit Shah AFSPA statement: पूर्वोत्तर भारत में शांति और विकास को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि सुरक्षा स्थिति में लगातार सुधार के कारण अगले साल तक एक-दो राज्यों को छोड़कर पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र से सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम (AFSPA) हटा लिया जाएगा.
अमित शाह ने कहा कि AFSPA के दायरे में आने वाले क्षेत्रों में लगातार कमी आना इस बात का संकेत है कि पूर्वोत्तर में शांति स्थापित हो रही है. उन्होंने बताया कि फिलहाल 80 प्रतिशत से अधिक पूर्वोत्तर क्षेत्र इस कानून से मुक्त हो चुका है. गृह मंत्री ने कहा कि यह बदलाव न केवल क्षेत्र की स्थिरता को दर्शाता है, बल्कि विकास, समृद्धि और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी नई मजबूती देगा.
नॉर्थ ईस्ट से हटेगा AFSPA
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा है कि अगर हालात इसी तरह बेहतर होते रहे तो अगले साल तक एक-दो राज्यों को छोड़कर पूरे पूर्वोत्तर भारत से AFSPA हटा दिया जाएगा. उनका कहना है कि जिन इलाकों से यह कानून हटाया गया है, वहां शांति और स्थिरता में सुधार देखने को मिला है.
असम-नगालैंड सीमा क्षेत्र में तेल और खनिज संसाधनों की खोज को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार, असम और नगालैंड के बीच एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए. इस मौके पर शाह ने कहा कि यह समझौता पूर्वोत्तर के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
AFSPA क्या है? (What is AFSPA Law)
AFSPA यानी आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर्स एक्ट 1958 में लागू किया गया था. यह कानून अशांत घोषित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों को विशेष अधिकार देता है. सबसे पहले इसे नागालैंड में लागू किया गया था, जिसके बाद पूर्वोत्तर के कई अन्य राज्यों के कुछ हिस्सों में भी इसे लागू किया गया. समय के साथ कई इलाकों से इसे हटाया जा चुका है, जबकि कुछ संवेदनशील क्षेत्रों में यह अब भी प्रभावी है.
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गृह मंत्री ने बताया कि असम-नगालैंड सीमा के विवादित क्षेत्रों में अधिकार-क्षेत्र को लेकर लंबे समय से मतभेद बने हुए थे, जिसके कारण तीन दशक से अधिक समय तक तेल और खनिजों की खोज का काम आगे नहीं बढ़ पाया. उन्होंने कहा कि नया समझौता इस बाधा को दूर करेगा और क्षेत्र में निवेश तथा आर्थिक गतिविधियों को नई गति देगा.
-भारत एक्सप्रेस
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