नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में रविवार, 1 नवंबर को अखिल विश्व गायत्री परिवार की ओर से आयोजित परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी के जन्मशताब्दी महोत्सव में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शामिल हुए. हजारों दीपों की रोशनी, वैदिक मंत्रोच्चार और आध्यात्मिक वातावरण के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में एकता, भाईचारे और विश्व कल्याण का संदेश दिया गया. पूरे समारोह में ‘वसुधैव कुटुंबकम् – वन वर्ल्ड, वन फैमिली’ की भावना प्रमुख रूप से देखने को मिली.
यह आयोजन युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य और वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के विचारों एवं आदर्शों को समर्पित रहा. कार्यक्रम के जरिए समाज में सकारात्मक बदलाव, राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक समरसता और मानव कल्याण के विचारों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया.
गायत्री मंत्र केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, जीवन बदलने का माध्यम- अमित शाह
समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह दिन श्रद्धा, सेवा और संकल्प का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि 100 वर्ष का पड़ाव अपने आप में पूर्णता का संकेत देता है और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के लिहाज से भी यह वर्ष बेहद महत्वपूर्ण है.
अमित शाह ने गायत्री मंत्र की महत्ता बताते हुए कहा कि इसे केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित करके नहीं देखना चाहिए. मंत्रों में मौजूद सकारात्मक ऊर्जा को जीवन में उतारने से व्यक्ति के भीतर छिपी अच्छी सोच, क्षमताओं और संभावनाओं को सामने लाया जा सकता है. उनके मुताबिक, आध्यात्मिक साधना इंसान की सोच, व्यवहार और कर्मों को बेहतर दिशा देने का रास्ता दिखाती है.
उन्होंने पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य को भारतीय अध्यात्म का महान मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि उन्होंने गायत्री मंत्र की शक्ति और उसके महत्व को आम लोगों तक पहुंचाने का बड़ा काम किया. खास तौर पर युवाओं को आध्यात्मिक विचारों से जोड़ने में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है.
शाह ने कहा कि करीब 15 करोड़ परिवारों को गायत्री मंत्र से जोड़ने का अभियान केवल धार्मिक विस्तार का प्रयास नहीं था, बल्कि अध्यात्म को आम जनजीवन का हिस्सा बनाने और मानव कल्याण की भावना को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी पहल थी.
राष्ट्र निर्माण के लिए जरूरी है समाज का जागरूक होना- डॉ. चिन्मय पण्ड्या
जन्मशताब्दी महोत्सव के दलनायक और देव संस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि देश के सामने आज अपनी सोच का दायरा बढ़ाने और व्यक्तिगत सीमाओं से ऊपर उठकर समाज के लिए काम करने का अवसर है.
डॉ. पण्ड्या ने कहा कि भारत के जागरण से ही दुनिया में सकारात्मक बदलाव की राह खुलेगी. उन्होंने लोगों से व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण और राष्ट्र निर्माण के तीन महत्वपूर्ण संकल्पों को अपने जीवन में अपनाने की अपील की. उनका कहना था कि जब व्यक्ति अपने विचार और व्यवहार में बदलाव लाएगा, तभी परिवार और समाज में भी बेहतर परिवर्तन देखने को मिलेगा.
कई केंद्रीय मंत्री और देश-विदेश की हस्तियां हुईं शामिल
इस महोत्सव में केवल राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र की ही नहीं, बल्कि धर्म, अध्यात्म, शिक्षा और स्वास्थ्य जगत की कई जानी-मानी हस्तियों ने भी हिस्सा लिया.
कार्यक्रम के अलग-अलग सत्रों में दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार, केंद्रीय मंत्री दुर्गादास उइके और डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी मौजूद रहे.
इसके अलावा चर्च ऑफ इंग्लैंड के एंग्लिकन बिशप राइट रेवरेंड लूसा, ब्रिटेन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य लॉर्ड रसेल रुक और लॉर्ड क्रिश रावल ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की. इस्कॉन बेंगलुरु के प्रमुख स्वामी मधु पंडित दास, आध्यात्मिक गुरु स्वामी ज्ञानानंद, मेदांता हॉस्पिटल के अध्यक्ष डॉ. नरेश त्रेहान, विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार और बीएपीएस के साधु भद्रेश स्वामी सहित कई अन्य विशिष्ट अतिथि भी समारोह का हिस्सा बने. पद्मश्री सत्यनारायण उनवल की उपस्थिति भी रही.
दीपों की रोशनी के बीच लिया गया मानवता और एकता का संकल्प
समारोह के दौरान डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने अतिथियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया. उन्हें गायत्री मंत्र लिखी चादर, रुद्राक्ष की माला, गंगाजली और युग साहित्य भेंट कर सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों और विदेशों से आए गायत्री परिवार के साधक भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे.
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