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RSS और राष्ट्र निर्माण: अमित शाह बोले- देश के हर क्षेत्र में संघ सेवकों का योगदान

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में आयोजित एक कार्यक्रम में उसके 25वीं वर्षगाठ को संबोधित करते हुए RSS के योगदान की जमकर सराहना की. उन्होंने कहा कि देश के हर क्षेत्र में संघ के स्वयंसेवकों का सकारात्मक प्रभाव है.

Amit Shah on RSS volunteer Impact

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को एक बार फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की भूमिका और देश निर्माण में उसके योगदान को लेकर बड़ी बात कही है. छत्तीसगढ़ के गठन की 25वीं वर्षगाठ को संबोधित करते हुए आयोजित कार्यक्रम में कहा कि भारत की आजादी से पहले और बाद की यात्रा में संघ के योगदान को कोई भी इतिहासकार अनदेखा नहीं कर सकता.

RSS की सोच से सकारात्मक बदलाव

अमित शाह का यह बयान ऐसे समय में आया है जब विचारधारा की लड़ाई को लेकर देश में अक्सर बहस छिड़ी रहती है. उन्होंने बड़े ही साफ शब्दों में कहा कि आज देश का शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र होगा, जहां संघ के स्वयंसेवकों ने अपनी मेहनत और सकारात्मक सोच से बदलाव न लाया हो.

विचारधारा और विकास का गहरा नाता

गृह मंत्री ने अपने संबोधन में इस बात पर खास जोर दिया कि किसी भी राज्य या देश का विकास तभी संभव है जब उसके पीछे एक मजबूत और सकारात्मक विचारधारा हो. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का पिछले ढाई दशकों का सफर इस बात का गवाह है. शाह ने भाजपा की विकासोन्मुखी राजनीति की तुलना उन विचारधाराओं से की जो केवल संघर्ष और विनाश को बढ़ावा देती हैं.

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का विकास किसी टकराव वाली सोच का नतीजा नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी वैचारिक बुनियाद पर खड़ा है जो समाज, अर्थव्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने पर केंद्रित है. शाह के मुताबिक, संघ के स्वयंसेवकों ने संस्थानों और सामाजिक जीवन के विभिन्न स्तरों पर जो काम किया है, वह राष्ट्र निर्माण के लिए सबसे प्रमुख स्तंभ रहा है.

‘अटल’ बनाम ‘मनमोहन’

भाषण के दौरान अमित शाह ने राज्यों के बंटवारे के इतिहास को याद करते हुए कांग्रेस और यूपीए सरकार पर तीखा तंज कसा. उन्होंने तुलना करते हुए बताया कि कैसे अटल बिहारी वाजपेयी के दौर में मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़, बिहार से झारखंड और उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड, तीन नए राज्य बने थे.

शाह ने कहा, “अटल जी के समय ये तीनों राज्य बड़ी ही शांति और आपसी सहमति से बने. न कोई दंगा हुआ, न कोई कड़वाहट रही. आज ये तीनों राज्य देश की तरक्की में कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं.”

वहीं, दूसरी ओर उन्होंने डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार के दौरान हुए आंध्र प्रदेश के विभाजन (तेलंगाना गठन) का जिक्र करते हुए कहा कि उस वक्त का माहौल बेहद तनावपूर्ण था. उन्होंने याद दिलाया कि कैसे विरोध प्रदर्शनों के बीच विधेयक पास हुआ और आंध्र प्रदेश के सांसदों को लोकसभा से बाहर तक करना पड़ा था. शाह ने तर्क दिया कि गलत तरीके से किए गए उस विभाजन की वजह से लंबे समय तक विवाद और कड़वाहट बनी रही.

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-भारत एक्सप्रेस



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