आज पूरा भारत उन 40 वीर सपूतों को याद कर रहा है, जिन्होंने 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में देश की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था. इस आतंकी हमले को आज सात साल बीत चुके हैं, लेकिन उन शहीदों के शौर्य और बलिदान की यादें आज भी हर हिंदुस्तानी के सीने में जल रही हैं. इस भावुक अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जवानों को नमन करते हुए आतंकवाद के खिलाफ भारत के सख्त इरादों को एक बार फिर दोहराया है.
वीर जवानों के शौर्य को किया स्मरण
पुलवामा की बरसी पर अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, ‘पुलवामा आतंकी हमले में शहीद होने वाले हमारे वीर जवानों के शौर्य का स्मरण कर उन्हें नमन करता हूं.’
पुलवामा आतंकी हमले में शहीद होने वाले हमारे वीर जवानों के शौर्य का स्मरण कर उन्हें नमन करता हूँ।
आतंकवाद मानवता का सबसे बड़ा दुश्मन है और भारत इसके समूल नाश के लिए दृढ़ संकल्पित है। आतंकवाद का सामना करने वाले हमारे सुरक्षा बलों व सुरक्षा एजेंसियों के साहस, समर्पण और बलिदान का…
— Amit Shah (@AmitShah) February 14, 2026
अमित शाह ने आगे कहा कि आतंकवाद मानवता का सबसे बड़ा दुश्मन है और भारत इसके समूल नाश के लिए दृढ़ संकल्पित है. आतंकवाद का सामना करने वाले हमारे सुरक्षा बलों व सुरक्षा एजेंसियों के साहस, समर्पण और बलिदान का देश सदैव ऋणी रहेगा.
आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’
गृह मंत्री का यह ट्वीट केवल एक श्रद्धांजलि संदेश नहीं है, बल्कि यह उन ताकतों को एक कड़ी चेतावनी भी है जो भारत की शांति को भंग करने का सपना देखती हैं. अमित शाह ने स्पष्ट कर दिया है कि मोदी सरकार आतंकवाद के “समूल नाश” के लिए प्रतिबद्ध है. पुलवामा हमले के बाद भारत ने जिस तरह से बालाकोट एयरस्ट्राइक के जरिए ‘घर में घुसकर’ जवाब दिया था, वह दुनिया के लिए एक बड़ा संदेश था कि अब भारत किसी भी कायराना हमले को बर्दाश्त नहीं करेगा.
गृह मंत्री ने अपने संदेश में सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों के “साहस और समर्पण” की भी सराहना की है. यह सच है कि सरहद पर तैनात जवान और खुफिया तंत्र की मुस्तैदी की वजह से ही आज देश के नागरिक सुरक्षित महसूस करते हैं.
देश शहीदों का सदैव ऋणी रहेगा
14 फरवरी 2019 की उस दोपहर को कोई नहीं भूल सकता, जब एक आत्मघाती हमलावर ने सीआरपीएफ (CRPF) के काफिले को निशाना बनाया था. उस हमले ने पूरे देश को गम और गुस्से में डुबो दिया था. आज सात साल बाद भी, जब हम उन जवानों की वीरता को याद करते हैं, तो पूरा देश एक स्वर में कहता है कि उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा. अमित शाह का यह बयान इसी राष्ट्रीय भावना को दर्शाता है कि देश अपने वीर जांबाजों के बलिदान का सदैव ऋणी रहेगा और आतंकवाद के खिलाफ यह लड़ाई उसके खात्मे तक जारी रहेगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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