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‘देशवासियों को राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा…’, डॉ. हेडगेवार की जयंती पर वैचारिक नमन करते हुए क्या बोले अमित शाह?

गृह मंत्री अमित शाह ने डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की जयंती पर उन्हें ‘युगदृष्टा’ बताते हुए श्रद्धांजलि दी. उन्होंने कहा कि हेडगेवार की विचारधारा आज भी युवाओं को राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा दे रही है…

Amit Shah tribute to Keshav Baliram Hedgewar Jayanti: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की जयंती के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है. शाह ने डॉ. हेडगेवार को एक ऐसा ‘युगदृष्टा’ और राष्ट्रवादी विचारक बताया, जिनकी दूरदर्शी सोच ने भारत की सांस्कृतिक चेतना को पुनर्जीवित करने का ऐतिहासिक कार्य किया.

अमित शाह ने सोशल मीडिया के माध्यम से साझा किया कि हेडगेवार जी ने युवा शक्ति को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का जो संकल्प लिया था. वही संकल्प आज एक ‘विराट वटवृक्ष’ के रूप में पूरी दुनिया के सामने खड़ा है. गृह मंत्री के इस संदेश को संघ के आगामी शताब्दी वर्ष और ‘विकसित भारत’ के संकल्प से जोड़कर देखा जा रहा है.

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के बीज से वटवृक्ष तक का सफर

अमित शाह ने अपने ट्वीट में डॉ. हेडगेवार के संघर्षपूर्ण जीवन और उनकी वैचारिक स्पष्टता पर विशेष जोर दिया. उन्होंने लिखा कि 1925 में विजयादशमी के दिन जिस छोटे से संगठन की नींव रखी गई थी, वह आज अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक एकता की एक अटूट परंपरा बन चुका है.

गृह मंत्री के अनुसार, हेडगेवार जी का मुख्य उद्देश्य केवल एक संगठन खड़ा करना नहीं था बल्कि एक ऐसी वैचारिक चेतना को जगाना था जो राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखे. आज संघ की व्यापकता और सेवा कार्य उसी महान सोच का परिणाम हैं, जिसे शाह ने आधुनिक भारत के निर्माण की सबसे मजबूत कड़ी बताया.

 

युवा शक्ति और चरित्र निर्माण पर अमित शाह का जोर

गृह मंत्री ने डॉ. हेडगेवार की उस सोच को रेखांकित किया जिसमें उन्होंने युवाओं को देश का असली कर्णधार माना था. अमित शाह ने कहा कि हेडगेवार जी ने पहचान लिया था कि किसी भी राष्ट्र की उन्नति उसके नागरिकों के चरित्र और समर्पण पर निर्भर करती है. उन्होंने युवाओं में मातृभूमि के प्रति अटूट निष्ठा और त्याग का जो भाव जगाया वही आज लाखों स्वयंसेवकों के जीवन का मूल मंत्र बन चुका है. शाह के मुताबिक, डॉ. हेडगेवार का ओजस्वी जीवन आने वाली कई पीढ़ियों को अनंतकाल तक राष्ट्र सेवा और आत्म-नियमन की प्रेरणा देता रहेगा.

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‘राष्ट्राय स्वाहा’: समर्पण और त्याग की अमर विरासत

अमित शाह ने डॉ. हेडगेवार के ‘राष्ट्राय स्वाहा, राष्ट्राय इदं न मम’ (राष्ट्र के लिए सब कुछ, यह मेरा नहीं है) के मंत्र का उल्लेख करते हुए इसे शासन और समाज के लिए मार्गदर्शक बताया. उन्होंने कहा कि हेडगेवार जी ने पद और प्रतिष्ठा की लालसा से ऊपर उठकर एक ‘ऋषितुल्य’ जीवन व्यतीत किया.

उनका संपूर्ण जीवन अनुशासन और संगठन के प्रति अटूट निष्ठा का अद्भुत उदाहरण है. शाह ने विश्वास जताया कि डॉ. हेडगेवार द्वारा स्थापित मूल्य ही आज के दौर में भारत को एक ‘विश्व गुरु’ के रूप में स्थापित करने की शक्ति प्रदान कर रहे हैं.

शताब्दी वर्ष की ओर बढ़ता संघ

डॉ. हेडगेवार की जयंती पर अमित शाह का यह संदेश ऐसे समय में आया है जब आरएसएस अपने 100 साल पूरे करने के बेहद करीब है. गृह मंत्री ने संकेत दिया कि डॉ. हेडगेवार की विरासत अब केवल विचारों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह भारत के सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य को दिशा देने वाली एक बड़ी ताकत बन चुकी है. उन्होंने अंत में कहा कि हेडगेवार जी की साधना और उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर ही हम सभी ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ एक सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के पथ पर निरंतर अग्रसर हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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