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डोल जात्रा के पावन पर्व पर गृह मंत्री अमित शाह ने असम समेत पश्चिम बंगाल और ओडिशा को दी शुभकामनाएं

डोल जात्रा के पावन अवसर पर गृह मंत्री अमित शाह ने असम के लोगों को दी शुभकामनाएं. जानिए क्यों असम में यह पर्व खास है और बारपेटा सत्र में कैसे भक्ति और रंगों का अनूठा संगम देखने को मिलता है.

Amit Shah Assam wishes Dol Jatra 2026

आज असम समेत पश्चिम बंगाल और ओडिशा भक्ति और रंगों के अद्भुत संगम में सराबोर है. डोल जात्रा के पवित्र अवसर पर राज्यों में उत्सव का माहौल है. इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने असम के लोगों को स्नेहपूर्ण बधाई दी है.

भक्ति और रंगों का त्योहार: Amit Shah

गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर असम के निवासियों को शुभकामना देते हुए लिखा, ‘असम के सभी भाइयों और बहनों को डोल जात्रा के पवित्र पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं.

अपने पोस्ट में अमित शाह ने आगे लिखा कि यह भक्ति और रंगों का त्योहार सभी के जीवन को स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि से भर दे.’

अमित शाह ने दो और अलग पोस्ट करते हुए पश्चिम बंगाल और ओडिशा को भी इस पवित्र पर्व की शुभकामनाएं दी.

असम के लिए डोल जात्रा का महत्व

असम में डोल जात्रा केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह महान संत श्रीमंत शंकरदेव द्वारा स्थापित वैष्णव संस्कृति का एक अभिन्न अंग है. विशेष रूप से बारपेटा सत्र (Barpeta Satra) में इस उत्सव का जो स्वरूप देखने को मिलता है, वह पूरे देश के लिए एक मिसाल है. यहाँ लोग ‘होली गीत’ गाते हैं, जो भगवान कृष्ण की लीलाओं पर आधारित होते हैं, और एक दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर प्रेम और भाईचारे का संदेश देते हैं.

यह पर्व न केवल हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है, बल्कि यह समाज में व्याप्त दुखों को भुलाकर एक नई ऊर्जा और सकारात्मकता के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देता है. असम के विभिन्न हिस्सों में आज सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जो राज्य की एकता और अखंडता को प्रदर्शित करता है.

सांस्कृतिक धरोहर का संवाहक

असम अपनी अनूठी परंपराओं के लिए जाना जाता है और डोल जात्रा उस धरोहर का एक चमकता हुआ हिस्सा है. आज जब पूरा असम रंगों में डूबा है, तो यह पर्व हमें याद दिलाता है कि विविधता में एकता ही हमारी असली ताकत है. चाहे वह बक्सा हो, बारपेटा हो या गुवाहाटी का हृदय स्थल, हर जगह डोल जात्रा की गूंज सुनाई दे रही है. यह त्योहार आने वाले समय के लिए स्वास्थ्य, समृद्धि और प्रगति का एक नया संकल्प लेकर आया है.

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-भारत एक्सप्रेस



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