आज असम समेत पश्चिम बंगाल और ओडिशा भक्ति और रंगों के अद्भुत संगम में सराबोर है. डोल जात्रा के पवित्र अवसर पर राज्यों में उत्सव का माहौल है. इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने असम के लोगों को स्नेहपूर्ण बधाई दी है.
भक्ति और रंगों का त्योहार: Amit Shah
गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर असम के निवासियों को शुभकामना देते हुए लिखा, ‘असम के सभी भाइयों और बहनों को डोल जात्रा के पवित्र पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं.
পবিত্ৰ দৌল মহোৎসৱৰ পবিত্ৰ ক্ষণত অসমৰ ভাই-ভনীসকললৈ আন্তৰিক শুভেচ্ছা জ্ঞাপন কৰিছোঁ। ভক্তি আৰু ৰঙৰ এই উৎসৱে সকলোৰে জীৱন সুস্বাস্থ্য, সুখ আৰু সমৃদ্ধিৰে পূৰ্ণ কৰি তোলক।
Greetings to our sisters and brothers of Assam on the auspicious occasion of Dol Jatra. May the festival of… pic.twitter.com/sYtqQqqJEU
— Amit Shah (@AmitShah) March 3, 2026
अपने पोस्ट में अमित शाह ने आगे लिखा कि यह भक्ति और रंगों का त्योहार सभी के जीवन को स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि से भर दे.’
দোল যাত্রার এই শুভক্ষণে পশ্চিমবঙ্গের সকল ভাই-বোনকে জানাই আন্তরিক শুভেচ্ছা। এই পবিত্র উৎসবের মহিমা আমাদের সংস্কৃতি ও ঐতিহ্যের সঙ্গে সম্পর্ককে আরও দৃঢ় করুক এবং সকলের জীবনে সুখ, সমৃদ্ধি ও প্রাচুর্য বয়ে আনুক।
Best wishes to our sisters and brothers of West Bengal on Dol Jatra. May… pic.twitter.com/6yyBJHeUEc
— Amit Shah (@AmitShah) March 3, 2026
ପବିତ୍ର ଦୋଳ ପୂର୍ଣ୍ଣିମାରେ ଓଡ଼ିଶାବାସୀଙ୍କୁ ହାର୍ଦ୍ଦିକ ଶୁଭେଚ୍ଛା। ଭଗବାନ ଶ୍ରୀକୃଷ୍ଣଙ୍କ ସହ ଆନନ୍ଦମୟ ମିଳନର ଏହି ପର୍ବ ସମସ୍ତଙ୍କ ଜୀବନରେ ଆନନ୍ଦ ଓ ସୌଭାଗ୍ୟର ଆଶୀର୍ବାଦ ଆଣିଦେଉ।
Warm wishes to the people of Odisha on Dola Purnima. May this festival of joyful union with Bhagwan Krishna invite all… pic.twitter.com/zHIffLUPYE
— Amit Shah (@AmitShah) March 3, 2026
अमित शाह ने दो और अलग पोस्ट करते हुए पश्चिम बंगाल और ओडिशा को भी इस पवित्र पर्व की शुभकामनाएं दी.
असम के लिए डोल जात्रा का महत्व
असम में डोल जात्रा केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह महान संत श्रीमंत शंकरदेव द्वारा स्थापित वैष्णव संस्कृति का एक अभिन्न अंग है. विशेष रूप से बारपेटा सत्र (Barpeta Satra) में इस उत्सव का जो स्वरूप देखने को मिलता है, वह पूरे देश के लिए एक मिसाल है. यहाँ लोग ‘होली गीत’ गाते हैं, जो भगवान कृष्ण की लीलाओं पर आधारित होते हैं, और एक दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर प्रेम और भाईचारे का संदेश देते हैं.
यह पर्व न केवल हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है, बल्कि यह समाज में व्याप्त दुखों को भुलाकर एक नई ऊर्जा और सकारात्मकता के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा भी देता है. असम के विभिन्न हिस्सों में आज सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जो राज्य की एकता और अखंडता को प्रदर्शित करता है.
सांस्कृतिक धरोहर का संवाहक
असम अपनी अनूठी परंपराओं के लिए जाना जाता है और डोल जात्रा उस धरोहर का एक चमकता हुआ हिस्सा है. आज जब पूरा असम रंगों में डूबा है, तो यह पर्व हमें याद दिलाता है कि विविधता में एकता ही हमारी असली ताकत है. चाहे वह बक्सा हो, बारपेटा हो या गुवाहाटी का हृदय स्थल, हर जगह डोल जात्रा की गूंज सुनाई दे रही है. यह त्योहार आने वाले समय के लिए स्वास्थ्य, समृद्धि और प्रगति का एक नया संकल्प लेकर आया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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