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गर्भपात की गोलियां या सिस्टम का फेलियर, बांसवाड़ा जिला अस्पताल में 4 प्रसूताओं की मौत पर सुलगी सियासत

Maternal Death Banswara: राजस्थान के बांसवाड़ा जिला अस्पताल में चार प्रसूताओं की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है. जिला प्रशासन ने बिना देर किए जांच कमेटी गठित कर दी है. जिला कलेक्टर डॉ. इंद्रजीत सिंह यादव ने मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल, सीएमएचओ खुशपाल सिंह राठौड़, पीएमओ और गायनिक विभाग से पूरा रिकॉर्ड तलब किया है.

Maternal Death Banswara

Maternal Death Banswara

रिपोर्ट- प्रमोद कलाल, बांसवाड़ा


Maternal Death Banswara: राजस्थान के बांसवाड़ा जिला अस्पताल में चार प्रसूताओं की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है. महात्मा गांधी जिला अस्पताल में हुई इन मौतों को लेकर जहां प्रशासन हरकत में आ गया है, वहीं अब इस पर सियासत भी तेज हो गई है. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सरकार को घेरा है.

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने बिना देर किए जांच कमेटी गठित कर दी है. जिला कलेक्टर डॉ. इंद्रजीत सिंह यादव ने मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल, सीएमएचओ खुशपाल सिंह राठौड़, पीएमओ और गायनिक विभाग से पूरा रिकॉर्ड तलब किया है. अब जांच के जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि प्रसूताओं की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसमें किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं.

गर्भपात की गोलियां खाने के बाद हुई अस्पताल में भर्ती

जिला प्रशासन ने चार प्रसूताओं की मौत की पुष्टि की है. शुरुआती जांच में सामने आया है कि इनमें से दो महिलाओं की हालत पहले से बेहद गंभीर थी. बताया जा रहा है कि ये दोनों गर्भपात की गोलियां खाने के बाद प्राइवेट अस्पताल से रेफर होकर जिला अस्पताल पहुंची थीं. उनकी स्थिति नाजुक होने के कारण डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका. बाकी मौतों के कारणों का खुलासा जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगा.

जिला कलेक्टर डॉ. इंद्रजीत सिंह यादव ने खुद जिला अस्पताल पहुंचकर गायनिक वार्ड का निरीक्षण किया. उन्होंने बताया कि फिलहाल जांच में किसी संक्रमण जैसी स्थिति की जानकारी सामने नहीं आई है. कलेक्टर के अनुसार, 24 घंटे के भीतर प्रारंभिक जांच से मौत के कारणों को लेकर तस्वीर कुछ हद तक साफ हो जाएगी. जांच रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदारी भी तय की जाएगी.

दोनों नवजात हैं सुरक्षित

इन मौतों के बाद दो नवजात बच्चों को लेकर भी प्रशासन ने जानकारी दी है. मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल के अनुसार दोनों नवजात सुरक्षित हैं. इनमें से एक नवजात को परिजनों को सौंप दिया गया है, जबकि दूसरा बच्चा आईसीयू में भर्ती है और डॉक्टरों की निगरानी में है.

इस मामले ने आदिवासी क्षेत्र में महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी बड़ी समस्या को भी सामने ला दिया है. अधिकारियों के मुताबिक, क्षेत्र की बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाओं में हीमोग्लोबिन की कमी पाई जाती है. अनुमान के अनुसार, करीब 90 प्रतिशत प्रसूताओं में एनीमिया जैसी समस्या देखने को मिलती है.

जागरूकता की कमी बन रही मौत की वजह

सरकार की ओर से समय-समय पर पोषण, दवाइयों, इंजेक्शन और जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन शिक्षा और स्वास्थ्य जागरूकता की कमी के चलते कई महिलाएं समय पर जांच नहीं करा पातीं. यही वजह है कि गर्भावस्था के दौरान जोखिम बढ़ जाता है.

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फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है. प्रशासन का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद मौतों की असली वजह सामने आएगी. यदि कहीं लापरवाही पाई गई, तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

-भारत एक्सप्रेस



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