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बिना नोटिस ब्यावर के कब्रिस्तान पर चला नगर परिषद का बुलडोजर, भू-माफियाओं से मिलीभगत के आरोप में मुस्लिम समाज में भारी रोष

ब्यावर में नगर परिषद की अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई एक बार फिर विवादों में है. सेंट पॉल्स स्कूल के पास स्थित बोहरा समाज के कब्रिस्तान में सालों पुराने निर्माण को ढहाए जाने के बाद तनाव फैल गया. सदर को हिरासत में लिए जाने के बाद मुस्लिम समाज ने आंदोलन की चेतावनी दी है.

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Rajasthan News: ब्यावर शहर के मेवाड़ी गेट बाहर स्थित सेंट पॉल्स स्कूल के पास उस वक्त माहौल गरमा गया जब नगर परिषद की टीम ने मुस्लिम बोहरा समाज के कब्रिस्तान में भारी पुलिस जाब्ते के साथ तोड़फोड़ शुरू कर दी. बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के की गई इस कार्रवाई से मुस्लिम समाज में गहरा आक्रोश है. औकाफ कमेटी ने नगर परिषद प्रशासन पर भू-माफियाओं के साथ साठगांठ का संगीन आरोप लगाया है.

वर्षों पुराने निर्माण को किया जमींदोज

जानकारी के अनुसार, मेवाड़ी गेट के बाहर स्थित कब्रिस्तान में जनाजे रखने और शव यात्रा के साथ आने वाले लोगों के बैठने के लिए वर्षों पहले टीन शेड, बरामदे और एक कमरे का निर्माण किया गया था. बुधवार को नगर परिषद का दस्ता जेसीबी (पीला पंजा) लेकर मौके पर पहुंचा और इन निर्माणों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया. कार्रवाई के तुरंत बाद नगर परिषद ने वहां अपनी संपत्ति होने का बोर्ड भी लगा दिया.

सदर को हिरासत में लेने पर बढ़ा तनाव

औकाफ कमेटी के सदर मोहम्मद हनीफ ने इस पूरी प्रक्रिया को असंवैधानिक बताया है. उनका कहना है कि यह जमीन वर्षों पहले मुस्लिम बोहरा समाज को कब्रिस्तान के उपयोग हेतु आवंटित की गई थी. अधिकारियों ने समाज का पक्ष सुनने या दस्तावेज देखने के बजाय सीधे बुलडोजर चला दिया.

कार्रवाई का विरोध करने पर पुलिस ने सदर मोहम्मद हनीफ को हिरासत में लेकर साकेत नगर थाने पहुंचा दिया, जिससे समाज के लोगों का गुस्सा और भड़क गया. मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों का कहना है कि प्रशासन ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को दरकिनार कर तानाशाही रवैया अपनाया है.

भू-माफियाओं और अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप

औकाफ कमेटी ने इस कार्रवाई के पीछे एक बड़े भूमि घोटाले की आशंका जताई है. कमेटी का आरोप है कि नगर परिषद के अधिकारी शहर की बेशकीमती सिवायचक और कब्रिस्तान की जमीनों पर नजर गड़ाए हुए हैं. आरोप लगाया गया है कि कुछ भ्रष्ट अधिकारी भू-माफियाओं के साथ मिलकर सरकारी जमीनों को कब्जा मुक्त कराने का नाटक करते हैं और बाद में उन्हीं जमीनों के पट्टे अपने चहेतों को जारी कर देते हैं.

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पुराने प्रस्तावों पर उठ रहे सवाल

मामले में नगर परिषद की 12 मार्च 2024 की एक बैठक का हवाला दिया जा रहा है जिसमें तत्कालीन सभापति और आयुक्त ने खसरा नंबर 2053 सहित अन्य भूमियों को परिषद कर्मचारियों के लिए आरक्षित करने का प्रस्ताव लिया था.

आरोप है कि एक तरफ तो परिषद वास्तविक अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई नहीं करती, वहीं दूसरी ओर कब्रिस्तान जैसी संवेदनशील जमीनों को निशाना बनाया जा रहा है. 20 नवंबर 2024 को पूर्व आयुक्त द्वारा पुलिस जाब्ता मांगने के बावजूद कई जगहों से अतिक्रमण नहीं हटाना, अधिकारियों की मंशा पर सवालिया निशान लगाता है.

इस घटना के बाद मुस्लिम समाज ने नगर परिषद प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस अवैध कार्रवाई के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाए गए और न्याय नहीं मिला तो पूरे शहर में उग्र आंदोलन किया जाएगा. फिलहाल इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और भारी पुलिस बल तैनात है.

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-भारत एक्सप्रेस



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