पिछले साल हुए ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया था. इस दौरान S-400 मिसाइल सिस्टम ने कई पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों को गिराकर अपनी ताकत साबित की. सबसे बड़ी उपलब्धि तब मिली जब एक हाई-वैल्यू पाकिस्तानी जासूसी विमान को 300 किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर निशाना बनाया गया.
चीन की वायु रक्षा प्रणाली की नाकामी
पाकिस्तान ने चीन से मिले HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किए थे, लेकिन वे भारतीय विमानों के सामने बेअसर साबित हुए. यही नहीं, वेनेजुएला और ईरान में भी अमेरिकी व इजरायली हमलों के दौरान HQ-9 सिस्टम पूरी तरह फेल हो गया. इससे साफ हो गया कि चीन की तकनीक वैश्विक स्तर पर भरोसेमंद नहीं है.
भारतीय वायुसेना की बढ़ती ताकत
चार दिन चले संघर्ष में भारतीय S-400 सिस्टम ने न सिर्फ पाकिस्तानी विमानों को गिराया बल्कि उनकी ओर से दागी गई क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों को भी नष्ट कर दिया. इस सफलता को वायुसेना ने निर्णायक मोड़ बताया.
रूस से नई खरीद की तैयारी
अब भारत अपनी एयर डिफेंस क्षमता को और मजबूत करने के लिए रूस से S-400 मिसाइल सिस्टम के पांच और स्क्वाड्रन खरीदने की दिशा में बढ़ रहा है. 2018 में भारत ने पहले ही पांच स्क्वाड्रन का सौदा किया था, जिनमें से तीन मिल चुके हैं और बाकी दो की डिलीवरी जल्द होने वाली है.
स्वदेशी विकल्प पर भी काम
रूस से खरीद के साथ-साथ भारत का DRDO भी अपनी लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली “कुशा” पर काम कर रहा है. इसका मकसद भविष्य में पूरी तरह स्वदेशी एयर डिफेंस क्षमता हासिल करना है.
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-भारत एक्सप्रेस
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