भटनेर का किला केवल ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि 1700 वर्षों के संघर्ष, सत्ता परिवर्तन और वीरता की जीवित मिसाल है. राजपूतों से लेकर मुगलों तक कई शासकों ने इस पर राज किया, लेकिन इसकी मजबूती और ऐतिहासिक महत्व आज भी बरकरार है. राजस्थान की यह धरोहर भारतीय इतिहास की अमूल्य संपत्ति है.
साल पुराना गौरवशाली 1700 इतिहास
भटनेर का किला भारत के सबसे प्राचीन और मजबूत किलों में से एक माना जाता है. इसका निर्माण जैसलमेर के राजा भट्टी के पुत्र भूपत राजपूत ने कराया था. सदियों से यह किला सत्ता और संघर्ष का केंद्र रहा है. इस किले पर समय-समय पर कई बड़े शासकों ने कब्जा किया. तैमूर, महमूद गजनवी, पृथ्वीराज चौहान, अकबर और कुतुब-उद-दीन ऐबक जैसे शासकों ने इस किले पर अधिकार किया.
मुगल शासनकाल में भी इस किले की मजबूती की चर्चा होती रही. तैमूर की आत्मकथा तुजुक-ए-तैमूरी और अकबरकालीन ग्रंथ आइन-ए-अकबरी में इसकी शक्ति का उल्लेख मिलता है.
रक्तरंजित संघर्ष और वीरता
भटनेर का इतिहास केवल सत्ता परिवर्तन की कहानी नहीं, बल्कि बलिदान की भी गाथा है. मुगलों ने इस किले पर कई बार आक्रमण किया. भट्टी राजपूतों ने इसे बचाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी. बाद में बीकानेर के राजा सूरत सिंह ने किले और शहर दोनों पर शासन किया.
अद्भुत आर्किटेक्चर और सुरक्षा व्यवस्था
यह किला मध्य एशिया से भारत आने वाले मार्ग पर एक मजबूत बैरिकेड की तरह खड़ा रहा. ऊंची और मोटी दीवारें, चारों ओर खाई और विशाल द्वार इसकी सुरक्षा को अभेद बनाते थे. किले के चारों ओर बने गोल गढ़ और मजबूत प्रवेश द्वार मुगल काल में सुरक्षा के लिहाज से और मजबूत किए गए. किले के भीतर 52 कुंड, भगवान शिव और हनुमान जी के मंदिर तथा एक मकबरा भी मौजूद है, जिसे शेर खान से जोड़ा जाता है.
पर्यटन के लिए खास आकर्षण
आज यह किला इतिहास प्रेमियों और पर्यटकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र है. हनुमानगढ़ जंक्शन रेलवे स्टेशन से लगभग 5 किलोमीटर दूर स्थित इस किले में प्रवेश के लिए कोई शुल्क नहीं है. भारतीय पुरातत्व विभाग समय-समय पर इसकी मरम्मत कराता रहता है.
-भारत एक्सप्रेस
Written By: Shubhra Rai (Intern)
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