प्रधानमंत्री मोदी ने शुक्रवार को राष्ट्रीय प्रगति में नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया और सभी क्षेत्रों में ऐसे नेताओं को विकसित करने के लिए एक ऐसे दृष्टिकोण का आह्वान किया, जो व्यवधानों के बीच भी प्रदर्शन करने में सक्षम हों.
उन्होंने जोर दिया कि प्रभावी नेतृत्व केवल राजनीति में ही नहीं, बल्कि व्यापार, प्रौद्योगिकी, शासन और शिक्षा में भी आवश्यक है. दो दिवसीय SOUL (स्कूल ऑफ अल्टीमेट लीडरशिप) कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए उन्होंने कहा, “SOUL इन व्यक्तियों में आलोचनात्मक सोच, जोखिम लेने और समाधान से प्रेरित मानसिकता विकसित करने वाला संस्थान होगा. आने वाले समय में इस संस्थान से ऐसे नेता निकलेंगे जो व्यवधानों के बीच काम करने के लिए तैयार होंगे.”
पीएम तोबगे ने मोदी शासन की तुलना बोधिसत्वों से की
द्विपक्षीय संबंधों के लिए शुभ संकेत इस अवसर पर विशेष अतिथि भूटानी प्रधानमंत्री दाशो शेरिंग तोबगे थे, जिन्होंने मोदी के शासन की तुलना बोधिसत्वों से की, उनके नेतृत्व को ज्ञान, साहस और करुणा का श्रेय दिया और SOUL के तहत भूटान की नौकरशाही को बदलने के लिए मार्गदर्शन का अनुरोध किया.
पीएम तोबगे ने 30 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने और भारत को ‘विकसित भारत’ की ओर ले जाने का श्रेय मोदी को दिया, साथ ही भूटान की महत्वाकांक्षी गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी (जीएमसी) परियोजना को स्थिरता के मॉडल के रूप में रेखांकित किया और इस पहल के पीछे भूटान के राजा को प्रेरक शक्ति बताया और मोदी के अमूल्य समर्थन को स्वीकार किया.
उन्होंने कहा, “जीएमसी दो प्रबुद्ध नेताओं की विरासत होगी, जो भूटान-भारत संबंधों को मजबूत करेगी और वैश्विक अवसर पैदा करेगी,” उन्होंने कहा, साथ ही उन्होंने भारत के व्यापारिक समुदाय को जीएमसी में निवेश करने का खुला निमंत्रण दिया.
-भारत एक्सप्रेस
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