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बिहार के दो बड़े बैंकों में सेंध! SBI में फर्जी ओवरड्राफ्ट और PNB में ठगी से मचा हड़कंप

बिहार में बैंकिंग धोखाधड़ी के दो मामले सामने आए हैं. गया की SBI शाखा में फर्जी दस्तावेजों के जरिए 68 ओवरड्राफ्ट खाते खोलकर 7.96 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी का आरोप है.

enforcement directorate

बिहार में बैंकिंग धोखाधड़ी के दो मामलों ने वित्तीय लेनदेन की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं. पहले मामले में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की गया स्थित मानपुर शाखा में फर्जी दस्तावेजों के सहारे 68 ओवरड्राफ्ट खाते खोलकर करीब 7.96 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी का आरोप है. वहीं, दूसरे मामले में मुजफ्फरपुर में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के खाताधारकों से करीब 1.29 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है. दोनों मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विशेष अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल की है.

SBI की मानपुर शाखा में कैसे हुई कथित गड़बड़ी?

गया के मानपुर स्थित SBI शाखा से जुड़े मामले में बैंक की तत्कालीन फील्ड ऑफिसर प्रीति सिंह पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं. ED के मुताबिक, प्रीति सिंह ने अपने पद का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल करते हुए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 68 ओवरड्राफ्ट खाते खुलवाए. जांच एजेंसी का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया में बैंक के रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ की गई और सावधि जमा यानी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था को भी कमजोर किया गया.

ओवरड्राफ्ट एक ऐसी सुविधा है, जिसके तहत बैंक अपने ग्राहकों को खाते में उपलब्ध रकम से अधिक पैसे निकालने की अनुमति देता है. आम तौर पर इसके लिए बैंक कुछ शर्तें और सुरक्षा इंतजाम तय करता है. इस मामले में आरोप है कि एक ही जमा राशि को बार-बार गारंटी के तौर पर इस्तेमाल करके अलग-अलग ओवरड्राफ्ट सुविधाएं हासिल की गईं.

ED की जांच के अनुसार, इन खातों को प्रीति सिंह ने अपने और रिश्तेदारों के नाम पर स्वीकृत कराया था. एजेंसी का कहना है कि इस तरीके से बैंक को कुल 7,96,00,916 रुपये का नुकसान हुआ. जांच एजेंसी ने इस रकम को कथित अपराध से अर्जित आय माना है.

निजी और पारिवारिक खर्चों में इस्तेमाल का आरोप

जांच में यह भी दावा किया गया है कि कथित तौर पर हासिल की गई रकम का इस्तेमाल निजी और पारिवारिक जरूरतों को पूरा करने के लिए किया गया. इसके अलावा, इसी पैसे से एक अन्य ऋण लेने के उद्देश्य से नई सावधि जमा तैयार करने की बात भी सामने आई है.

मामले में एक अहम बात यह है कि बैंक ने बाद में गिरवी रखी गई FD से ओवरड्राफ्ट की बकाया रकम वसूल कर ली थी. बाकी रकम प्रीति सिंह ने कथित तौर पर अपने परिवार और रिश्तेदारों की मदद से वापस की.

हालांकि, ED का कहना है कि रकम लौटाने से कथित धनशोधन के आरोप अपने आप खत्म नहीं हो जाते. एजेंसी के मुताबिक, पैसा वापस किए जाने से पहले उसका इस्तेमाल किया जा चुका था. अब अदालत में पेश किए गए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर मामले की कानूनी जांच होगी.

CBI की प्राथमिकी के बाद ED ने शुरू की जांच

इस मामले की शुरुआत केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की प्राथमिकी से हुई थी. CBI ने 30 दिसंबर 2022 को आरोपपत्र दाखिल किया था. इसके बाद ED ने धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत जांच आगे बढ़ाई.

जांच पूरी करने के बाद ED ने 30 सितंबर 2026 को पटना की विशेष PMLA अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल की. एजेंसी ने अदालत से प्रीति सिंह के खिलाफ मुकदमा चलाने और कानून के मुताबिक कार्रवाई करने की मांग की है. फिलहाल, आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में होने वाली सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा.

PNB खाताधारकों से 1.29 करोड़ रुपये की ठगी का दूसरा मामला

बिहार में बैंक खातों से जुड़ी धोखाधड़ी का एक अन्य मामला मुजफ्फरपुर से सामने आया है. यहां पंजाब नेशनल बैंक के खाताधारकों से कथित तौर पर 1.29 करोड़ रुपये की ठगी की गई. इस मामले में ED ने छह लोगों के खिलाफ पटना की विशेष PMLA अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल की है.

आरोपितों में जफर इकबाल, नितेश कुमार सिंह, संतोष आनंद, राजेश कुमार, मंझय कुमार सिंह और कुंदन कुमार के नाम शामिल हैं. ED ने 29 सितंबर को अदालत में शिकायत दाखिल कर आरोपितों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की थी.

जांच एजेंसी के मुताबिक, इस मामले की पड़ताल बिहार पुलिस की ओर से दर्ज दो प्राथमिकी के आधार पर शुरू हुई. आरोप है कि जफर इकबाल और उसके सहयोगियों ने PNB के अधिकारी नितेश कुमार सिंह की मदद से खाताधारकों के बैंक खातों से रकम निकाल ली.

इस कथित धोखाधड़ी में मोबाइल सिम की अदला-बदली किए जाने की बात सामने आई है. जांच के अनुसार, सिम बदलने के कारण खाताधारकों को बैंक लेनदेन से जुड़े संदेश नहीं मिल पाए. इससे उनके खातों से रकम निकाले जाने की जानकारी समय पर नहीं मिल सकी.

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-भारत एक्सप्रेस



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