Bihar Election Result 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की मतगणना के नतीजों में एनडीए गठबंधन के सभी दलों का प्रदर्शन शानदार रहा है. लेकिन पूरे राज्य में करीब 27 सीटों पर लड़ रहे चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (रामविलास) का स्ट्राइक रेट भाजपा -जदयू से भी ऊपर रहा.
चिराग पासवान ने इस चुनावी खेल में हेलीकॉप्टर शॉट मारकर उम्मीदों से कई ज्यादा बढ़कर प्रदर्शन किया है. उनकी पार्टी ने 28 सीटों में से 19 सीटों को अपने नाम किया है, जो किसी भी क्षेत्रीय पार्टी के लिए एक मजबूत प्रदर्शन माना जाता है.
कब हुई लोजपा की स्थापना
लोजपा पार्टी को साल 2000 में राम विलास पासवान में बनाई थी, जिसने बिहार की राजनीति में अपनी एक अलग पहचान बनाई. दलित वोट बैंक और केंद्र की सत्ता में भागीदारी के नाते, भले ही बिहार विधानसभा में पार्टी की उपस्थिति सीमित रही हो, लेकिन पार्टी ने राष्ट्रीय स्तर मुख्य निभाता आया है. आज 2025 के विधानसभा चुनाव में लोजपा के प्रदर्शन ने एक बार फिर अपना असर दिखाया है.
आपको बता दें कि इस पार्टी की स्थापना दलितों और पीड़ित वर्गों की आवाजों को उठाने के उद्देश्य से की गई थी.
लोजपा का राजनीतिक उतार-चढ़ाव
बिहार विधानसभा चुनाव 2005 में पासवान ने एक बड़ा दांव चला. केंद्र में तो ये कांग्रेस सरकार का हिस्सा बनी ही रही साथ में बिहार में भी कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा. इसमें रामविलास पासवान की पार्टी ने बेहतरीन प्रदर्शन कर 29 सीटों पर अपनी जीत दर्ज की थी. हालांकि, उन्हें सरकार बनाने की भागेदारी नहीं मिल पाई, जिसके बाद 2005 में दोबारा चुनाव हुए. इसमें पासवान की पार्टी को केवल 10 सीट ही मिल पाई और नीतीश कुमार ने बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बना ली.
वहीं 2010 के बिहार विधानसभा चुनाव में एक बार फिर लोजपा कमजोर पड़ गई. इसमें वो केवल 3 सीट ही निकाल पाई और एक बार फिर नीतीश-बीजेपी गठबंधन वाली सरकार बनी.
राजनीति में टर्निंग प्वाइंट
2014 के लोकसभा चुनाव के लिए गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे को आगे रखा गया. एनडीए का यह फैसला नीतीश को रास नहीं आया और उन्होंने एनडीए के साथ अपना गठबंधन तोड़ दिया.
नीतीश का ये फैसला लोजपा के लिए एक शानदार मौका साबित हुआ. लोजपा ने 2014 लोकसभा चुनाव में एनडीए का दामन थाम लिया और बिहार में 7 लोकसभा सीटों पर लड़ रही इस पार्टी ने 6 सीटों को अपने नाम कर लिया. बाद में राम विलास पासवान को केंद्र मंत्री भी बनाया गया.
वहीं 2019 के लोकसभा चुनाव में गहमागहमी के बाद लोजपा को 6 सीटों पर लड़ने का मौका मिला. इसमें लोजपा पार्टी ने हर सीट पर अपनी जीत दर्ज की, जिसके बाद चिराग पासवान को आगे किया गया. साथ ही चिराग को लोक जनशक्ति पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया गया, और उन्होंने ‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ का नारा दिया.
आपको बता दें कि 2020 के बिहार के विधानसभा चुनाव में लोजपा ने एनडीए का साथ छोड़ अपने 137 उम्मीदवारों को उतारा था. हालांकि वो केवल 1 ही सीट जीत पाई थी.
-भारत एक्सप्रेस
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