Bharat Express DD Free Dish

क्या गुलाम बन गया था भारत? निशिकांत दुबे ने नेहरू, इंदिरा पर लगाए सौदों के आरोप; पढ़ें 7 जून का काला अध्याय

Nishikant Dubey On Black Day 7 Jun: बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने 7 जून 1974 को भारतीय इतिहास का ‘काला अध्याय’ बताया है. उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने ‘बैलेंस ऑफ पेमेंट’ समझौते पर साइन करके देश को अमेरिका का आर्थिक गुलाम बना दिया. वहीं कांग्रेस ने इसे इतिहास से छेड़छाड़ बताया है.

Nishikant Dubey Congress ndira Gandhi Jawaharlal Nehru history

Nishikant Dubey On Black Day 7 Jun: भारतीय राजनीति में इतिहास के पन्ने एक बार फिर पलट गए हैं और इस बार जो ‘काला सच’ बाहर आया है, उसने सत्ता के गलियारों में खलबली मचा दी है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मुखर सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पार्टी, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और जवाहरलाल नेहरू पर अब तक का सबसे बड़ा और सनसनीखेज हमला बोला है. दुबे ने 7 जून 1974 को भारतीय इतिहास का एक ‘काला अध्याय’ करार देते हुए दावा किया है कि इसी दिन देश की अर्थव्यवस्था को हमेशा के लिए अमेरिका का ‘गुलाम’ बना दिया गया था.

नेहरू ने बोए बीज, इंदिरा ने किया ‘गुलामी का हस्ताक्षर’

निशिकांत दुबे (BJP MP Nishikant Dubey) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी लंबी चौड़ी पोस्ट में कई चौंकाने वाले दावे किए हैं. उन्होंने कहा कि 7 जून 1974 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अमेरिका के दबाव में आकर ‘बैलेंस ऑफ पेमेंट्स’ (Balance of Payments) समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए थे.

इस समझौते ने भारत को अमेरिका की एक ‘औपनिवेशिक आर्थिक कॉलोनी’ (Economic Colony) का दर्जा दे दिया. दुबे ने इससे भी बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि इस आर्थिक गुलामी के बीज आज़ादी के तुरंत बाद, 1949 में ही जवाहरलाल नेहरू ने बो दिए थे.

ये भी पढ़ें: राज्यसभा की ‘महा-जंग’: झारखंड में आंध्र प्रदेश की एंट्री, आंकड़ों में उलझा चुनाव; समझें BJP-JMM-Congress की माथापच्ची

डॉलर का दबदबा और रुपये का ‘अवमूल्यन’ (Nishikant Dubey On Balance of Payment agreement)

बीजेपी सांसद ने इतिहास का वो पन्ना भी खोला जिसके बारे में कम ही लोग जानते हैं. 1962 से पहले भारत का व्यापार दूसरे देशों की स्थानीय करेंसी या ‘पाउंड स्टर्लिंग’ में होता था. लेकिन अमेरिका ने अपनी ताकत का इस्तेमाल करते हुए भारत को ‘ब्रेटन वुड्स व्यापार समझौते’ (Bretton Woods Agreement) पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर कर दिया.

ये भी पढ़ें: 2027 के लिए चंद्रशेखर आजाद ने बिछाई बिसात, बताया किस मॉडल पर लडेंगे उत्तर प्रदेश का चुनाव

नतीजा क्या हुआ? भारत का व्यापार सिर्फ ‘अमेरिकी डॉलर’ (US Dollar) तक सीमित हो गया और हमारी आर्थिक किस्मत पूरी तरह डॉलर के उतार-चढ़ाव पर निर्भर हो गई. इसी दबाव के चलते 6 जून 1966 को इंदिरा गांधी को भारतीय रुपये का ‘डिवैल्यूएशन’ (अवमूल्यन यानी रुपये की कीमत कम) करना पड़ा, जिससे डॉलर के मुकाबले रुपया औंधे मुंह गिरने लगा.

कांग्रेस ने किया तगड़ा पलटवार

निशिकांत दुबे के इन धारदार आरोपों ने कांग्रेस खेमे में आग लगा दी है. कांग्रेस ने दुबे के इन सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह से निराधार और ‘दुर्भावनापूर्ण’ करार दिया है. पार्टी ने पलटवार करते हुए कहा है कि, “इतिहास को अपने हिसाब से तोड़-मरोड़ कर पेश करना और झूठ फैलाना भारतीय जनता पार्टी की पुरानी फितरत रही है.

ये भी पढ़ें: हराम..गुनाह..बेदखल: महिला MLA ने जलाया दीप तो ‘सुलगे’ मौलाना, केरलम में सियासी बवाल

अब भले ही कांग्रेस इन आरोपों को खारिज कर रही हो, लेकिन निशिकांत दुबे के इस ‘ऐतिहासिक बम’ ने देश में एक नई बहस जरूर छेड़ दी है कि क्या वाकई 7 जून 1974 को भारत की आर्थिक आजादी का सौदा कर दिया गया था?



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read