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CBI ने BECIL अधिकारियों व निजी कंपनी के CEO समेत पांच के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की– 50 करोड़ के लोन घोटाले और रिश्वतखोरी का मामला

CBI ने BECIL अधिकारियों और एक निजी कंपनी के सीईओ समेत पांच लोगों के खिलाफ 50 करोड़ रुपये के लोन घोटाले और रिश्वतखोरी के मामले में चार्जशीट दाखिल की है. यह घोटाला 2022 में मंजूर किए गए वेंचर लोन से जुड़ा है.

CBI

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने आज एक बड़े लोन घोटाले और रिश्वतखोरी के मामले में बीईसीआईएल (BECIL) के तत्कालीन चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर जॉर्ज कुरुविला, तत्कालीन महाप्रबंधक डब्ल्यू.बी. प्रसाद, तत्कालीन लीगल एडवाइज़र आशीष प्रताप सिंह और मुंबई स्थित निजी कंपनी द ग्रीन बिलियंस लिमिटेड (TGBL) के सीईओ प्रतीक कनकिया समेत पांच आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है.

यह मामला सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार से मिली शिकायत पर 3 सितंबर 2024 को सीबीआई द्वारा दर्ज किया गया था. आरोप है कि बीईसीआईएल के तत्कालीन सीएमडी ने वर्ष 2022 में बीईसीआईएल के ही अन्य अधिकारियों और मुंबई की उक्त निजी कंपनी के सीईओ के साथ मिलकर 50 करोड़ रुपये के वेंचर लोन की मंजूरी और वितरण में भारी अनियमितताएं कीं.

IREDA से लिया गया लोन, निजी कंपनी को स्थानांतरित

जांच में खुलासा हुआ कि बीईसीआईएल के अधिकारियों ने इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (IREDA) से 80 करोड़ रुपये का शॉर्ट टर्म कॉरपोरेट लोन लिया और उसमें से 50 करोड़ रुपये का वेंचर लोन उपरोक्त निजी कंपनी को तीन किस्तों में वितरित किया गया. यह फंड पुणे नगर निगम के “वेस्ट टू एनर्जी” प्रोजेक्ट के लिए बताया गया था, लेकिन आरोप है कि सीईओ ने इस धनराशि का दुरुपयोग किया और इसका बड़ा हिस्सा व्यक्तिगत लाभ के लिए खर्च किया.

सीबीआई ने यह भी बताया कि इस साजिश के तहत बीईसीआईएल अधिकारियों को अप्रैल 2022 में 2 करोड़ रुपये और अप्रैल 2023 में 1 करोड़ रुपये की रिश्वत दी गई. इसके अतिरिक्त बीईसीआईएल अधिकारियों ने बिना किसी कोलेटरल सिक्योरिटी के ही 25 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि भी उसी कंपनी को जारी कर दी, जिससे संस्था को कुल 58.60 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.

जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी परफॉर्मेंस बैंक गारंटी का उपयोग किया गया और परियोजना से संबंधित मूल दस्तावेज भी नष्ट कर दिए गए. आरोपियों में से तत्कालीन सीएमडी, जीएम और सीईओ को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और वे वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं.

सीबीआई की यह कार्रवाई सरकारी संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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