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Cloud Seeding क्या है? Delhi में ‘बहुत खराब’ AQI के बीच बिन बादल कराई जाएगी बारिश, समझिए कैसे दूर होगा प्रदूषण

Artificial Rain Explained: दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण कम करने के लिए क्लाउड सीडिंग का सहारा लिया जा रहा है. यह सिल्वर आयोडाइड से कृत्रिम बारिश कराने की वैज्ञानिक तकनीक है. आइए इसे यहां समझते हैं.

Delhi Cloud Seeding

दिल्ली में कृत्रिम बारिश

Delhi Cloud Seeding: देश की राजधानी दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बना हुआ है, जहां केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार मंगलवार को कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 304 दर्ज किया गया. इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए, दिल्ली ने एक उच्च जोखिम वाले प्रयोग, Cloud Seeding (कृत्रिम बारिश) का ऑपरेशनल ट्रायल शुरू कर दिया है. मंगलवार के ट्रायल से तत्काल बारिश नहीं हुई थी, लेकिन बुधवार, 28 अक्टूबर 2025 को दूसरा ट्रायल सफल रहा.

सफल रहा कृत्रिम बारिश का दूसरा ट्रायल

भारतीय जनता पार्टी के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने पुष्टि की कि प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से किया गया दूसरा ट्रायल सफल रहा. यह ट्रायल एक सेसना प्लेन के जरिए मेरठ से दिल्ली के बीच किया गया, जिसमें खेकड़ा, बुराड़ी और मयूर विहार जैसे इलाकों को कवर किया गया. इस प्रक्रिया में 8 फ्लेयर का उपयोग हुआ और यह लगभग आधे घंटे तक चली. उन्होंने बताया कि क्लाउड सीडिंग का तीसरा ट्रायल भी आज ही किया जाएगा, जिसके कारण 15 मिनट से 4 घंटे के बीच कभी भी बारिश हो सकती है. आने वाले दिनों में और ट्रायल भी मौसम की अनुकूलता पर निर्भर करेंगे.

Delhi Cloud Seeding

Cloud Seeding क्या है और यह कैसे काम करती है?

क्लाउड सीडिंग एक वैज्ञानिक मौसम संशोधन तकनीक है, जिसका उपयोग कृत्रिम रूप से वर्षा प्रेरित करने के लिए किया जाता है. यह उन बादलों में नमी से पानी बरसाने की प्रक्रिया है, जिनमें पहले से ही आर्द्रता मौजूद होती है.

इसमें सबसे आम तौर पर सिल्वर आयोडाइड या नमक के यौगिक जैसे महीन कणों को बादलों में फैलाया जाता है. ये कण “बीज” (seeds) के रूप में कार्य करते हैं, जिससे बादल में मौजूद पानी की बूंदें आपस में मिलकर बड़ी हो जाती हैं और अंततः इतनी भारी हो जाती हैं कि बारिश के रूप में नीचे गिरती हैं. यह तकनीक विशेष रूप से वायु से धूल और प्रदूषकों को अस्थायी रूप से साफ करके अल्पकालिक राहत प्रदान कर सकती है. दिल्ली के प्रयोग में विमान-आधारित सीडिंग तकनीक का उपयोग किया जा रहा है.

Pollution Solution: दिल्‍ली में बिना बादल होगी बारिश- इस तरह प्रदूषण को किया जाएगा काबू, आज तीसरा ट्रायल

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