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जाति जनगणना और ओबीसी प्रतिनिधित्व: कांग्रेस की नई सियासी दिशा

राहुल गांधी की ‘जाति जनगणना’ और ‘हिस्सेदारी’ की नीति के तहत कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी में है. ओबीसी नेताओं को संगठन में बढ़े प्रतिनिधित्व देने की योजना.

Congress OBC leadership
Edited by Akansha

कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा जाति जनगणना पर जोर दिए जाने और ‘जिसकी जितनी हिस्सेदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी’ की बात करने के बाद, सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस पार्टी संगठनात्मक भूमिका में ओबीसी नेताओं को अधिक अवसर देकर बड़े पैमाने पर फेरबदल करने की योजना बना रही है.

कांग्रेस ने पिछले कुछ महीनों में की कई नियुक्तियां

कांग्रेस ने पिछले कुछ महीनों में कई नियुक्तियां की हैं, जो इस बात की झलक देती हैं कि राहुल गांधी, जो लोकसभा में विपक्ष के नेता भी हैं, पिछले दो वर्षों से किस बात की वकालत कर रहे हैं और अपनी चिंता व्यक्त कर रहे हैं.

पार्टी ने संगठन में इन नेताओं को दिए कई पद

कांग्रेस के सूत्रों ने बताया कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को अधिक प्रतिनिधित्व देने का विचार राहुल गांधी का है. सूत्र ने कहा कि पिछले कुछ सालों में पार्टी ने संगठन में एससी, एसटी और आदिवासी समुदाय से आने वाले नेताओं को कई पद दिए हैं और अब ओबीसी को प्रतिनिधित्व देने का समय आ गया है. सूत्र ने कहा कि पार्टी में कई लोगों को लगता है कि पार्टी ने दलितों, अल्पसंख्यकों, एससी, एसटी और आदिवासियों के बीच वोटबैंक को मजबूत किया है.

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सूत्र ने बताया, “लेकिन पार्टी अभी भी ओबीसी वोट बैंक को अपने साथ नहीं ला पाई है, जो ज्यादातर बीजेपी और ज्यादातर क्षेत्रीय दलों के पास रहा है. इसलिए आने वाले दिनों में होने वाले नए फेरबदल में ओबीसी को प्रतिनिधित्व देना अहम कारक होगा. यह कवायद बड़े पैमाने पर होगी और साफ तौर पर दिखाई देगी. यह भी संकेत है कि पिछले हफ्ते पार्टी के प्रवक्ता और मीडिया पैनलिस्ट कार्यशाला के दौरान राहुल गांधी से बातचीत करने वाले 140 प्रवक्ताओं में ओबीसी समुदाय के कई नेता भी शामिल थे.

जाति जनगणना के मुद्दे पर राहुल गांधी ने कही ये बात

जाति जनगणना के मुद्दे पर राहुल गांधी ने बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि चाहे जितनी भी आलोचना हो, कांग्रेस अपने रुख से पीछे नहीं हटेगी. राहुल गांधी ने कहा कि इतना ही नहीं, भाजपा द्वारा की गई घोषणा हमारे दबाव का नतीजा है – इसका श्रेय हमें मिलेगा.” राहुल गांधी और कांग्रेस पिछले दो सालों से अनुसूचित जातियों, जनजातियों और पिछड़ों को उचित प्रतिनिधित्व देने का मुद्दा उठा रहे हैं.  जब सरकार ने जाति जनगणना की घोषणा की थी, तब भी राहुल गांधी और कांग्रेस ने सरकार से पूरी पारदर्शिता के साथ इस प्रक्रिया को करने की मांग की थी. पार्टी ने यह भी कहा है कि वह आरक्षण की सीमा को 50 प्रतिशत से बढ़ाने के लिए काम करेगी.



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