Delhi Assembly Session: दिल्ली विधानसभा का मानसून सत्र आज (सोमवार) से शुरू हो गया है. ये सत्र अगले चार दिनों यानि 8 अगस्त तक चलेगा. इस दौरान कई महत्वपूर्ण बिलों को पेश किया जाएगा. इसी बीच रेखा गुप्ता की सरकार ने आज विधानसभा में प्राइवेट स्कूलों की नियंत्रित करने के लिए ‘दिल्ली स्कूल शिक्षा Transparency in Fixation and Regulation of Fees बिल 2025’ पेश किया है.
इस नए कानून के तहत दिल्ली के करीब 1677 निजी स्कूलों की फीस अब सीधे सरकार के नियंत्रण में होगी. स्कूल कितनी फीस वसूल सकते हैं या कब बढ़ा सकते हैं इसका फैसला अब तीन स्तरीय समितियों तय करेगी. इसके साथ ही बिल के अनुसार, इन समितियों के फैसलों को किसी भी जिला अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकेगी और न ही अदालत इन मामलों में कोई निर्णय सुन सकेगी.
दिल्ली के प्राइवेट स्कूल अपनी मनमानी अब बंद
कई सालों से ऐसा देखा गया है की दिल्ली के प्राइवेट स्कूल अपनी मनमानी करते हैं, जब मन होता है तब फीस बढ़ा देते है और अभिभावक भी इससे काफी परेशान रहते हैं. इसी को देखते हुए दिल्ली सरकार ने ये बिल पेश किया है. इसका मकसद साफ है कि मनमानी तरीके से फीस बढ़ाने पर लगाम लगाया जाए और अभिभावकों को राहत दी जाए.
इस विधेयक के अनुसार, कोई भी निजी स्कूल निर्धारित फीस से अधिक पैसे नहीं ले सकेगा. स्कूलों को केवल तीन साल में एक बार ही फीस बढ़ाने की अनुमति होगी. स्कूल में फीस बढ़ाने संबंधित प्रस्तावों पर विचार करने के लिए प्रत्येक स्कूल में एक ‘स्कूल-स्तरीय फीस विनियमन समिति’ का गठन किया जाएगा, जो इस मुद्दे पर चर्चा करेगी.
स्कूलों पर लगाया भारी जुर्माना
नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त सजा का प्रावधान है. पहली बार नियम तोड़ने पर स्कूल पर 1 लाख से 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. बार-बार नियमों का उल्लंघन करने पर यह जुर्माना 2 लाख से 10 लाख रुपये तक बढ़ सकता है. यदि कोई स्कूल फीस वापस नहीं करता या लगातार नियमों की अनदेखी करता है, तो उसके प्रबंधन पदाधिकारियों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है या स्कूल की मान्यता रद्द की जा सकती है. यह विधेयक 1 अप्रैल 2025 से पूर्वव्यापी (रेट्रोस्पेक्टिव) रूप से लागू होगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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