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दिल्ली हाई कोर्ट ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्रों के निलंबन पर लगाई रोक, समिति गठित करने का आदेश

दिल्ली हाई कोर्ट ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में बिना अनुमति के विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों के निलंबन और उन्हें परिसर में प्रवेश से रोकने के आदेश पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने विश्वविद्यालय प्रशासन को स्थिति को शांत करने के लिए समिति गठित करने का निर्देश दिया है.

Delhi High Court

दिल्ली हाई कोर्ट ने बिना अनुमति के विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों को निलंबित करने  और उसे जामिया मिल्लिया इस्लामिया परिसर में प्रवेश पर रोक लगाने संबंधी चीफ प्रॉक्टर के अगले आदेश तक रोक लगा दिया है.

साथ ही कोर्ट ने स्थिति को शांत करने के लिए एक समिति को गठित करने का निर्देश भी दिया है. समिति का गठन विश्विद्यालय की कुलपति की देखरेख में किया जाएगा, जिसमें छात्रों के प्रतिनिधियों सहित अन्य अधिकारी शामिल होंगे.

प्रॉक्टर के आदेश के खिलाफ छात्रों की याचिका

इस मामले में कई छात्रों ने प्रॉक्टर के 12 फरवरी के एक पत्र का विरोध किया था, जिसमें कहा गया था कि छात्र बिना अनुमति के विरोध प्रदर्शन नहीं करेंगे. इसी पत्र को लेकर छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया था और उन्हें निलंबित कर दिया गया था.

छात्रों ने उस आदेश को चुनौती दी थी कि कथित रूप से17 छात्रों को पूर्व अनुमति के बिना विरोध प्रदर्शन करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए निलंबित किया गया था. छात्र बिना अनुमति के विरोध प्रदर्शन और बैठकों पर प्रतिबंध लगाने के जामिया मिल्लिया इस्लामिया के आदेश का विरोध कर रहे थे.

आपराधिक मामलों पर कोई प्रभाव नहीं

जस्टिस ने इस मामले में याचिकाओं पर नोटिस जारी किया और कहा कि वह फिलहाल विरोध के कारणों पर विचार नहीं कर रहे हैं. लेकिन रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया पता चलता है कि यह एक शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन था. उन्होंने कहा कि सभी छात्र कम उम्र के है.

जब छात्र विश्वविद्यालय जाते हैं तो निश्चित रूप से कानून के दायरे में अपनी आवाज उठाने का प्रयास करते हैं.इस तरह से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने से नगरिक समाज के बुनियादी सिद्धांतों और मानदंडों का पालन होता है.

कोर्ट ने कहा कि उसे पूरा विश्वास है कि विश्वविद्यालय प्रशासन कुलपति, डीन और चीफ प्रॉक्टर स्थिति को शांत करने के लिए तुरंत सुधारात्मक कदम उठाएंगे.

उसने स्पष्ट किया कि उसने छात्रों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों पर विचार नही किया है.वर्तमान आदेश का उन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.


-भारत एक्स्प्रेस 


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