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दिल्ली हाईकोर्ट का सरकार को निर्देश— छोटे अस्पतालों और नर्सिंग होम में आग से बचाव करने वाली सुविधाओं पर 4 हफ्तों में निर्णय लें

याचिकाकर्ता ने विवेक विहार में बेबी केयर न्यू बोर्न अस्पताल में 26 मई को हुई एक हालिया घटना को देखते हुए दाखिल की गई थी.

Delhi High Court
Vikash Jha Edited by Vikash Jha

दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी के छोटे अस्पतालों एवं नर्सिग होम में अग्नि सुरक्षा एवं उसमें स्प्रिंकलर जैसी सुविधाएं अनिवार्य किए जाने के मुद्दे पर दिल्ली सरकार से चार सप्ताह के भीतर निर्णय लेने को कहा है. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन एवं न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की पीठ ने सरकार से इसको लेकर दाखिल याचिका को बतौर अभ्यावेदन मानने एवं उसपर उचित समय के भीतर निर्णय लेने को कहा है. साथ ही निर्णय की प्रति आठ सप्ताह के भीतर कोर्ट में दाखिल करने को कहा है.

पीठ ने सरकार को यह निर्देश युगांश मित्तल की याचिका को निपटाते हुए दिया है. याचिकाकर्ता ने विवेक विहार में बेबी केयर न्यू बोर्न अस्पताल में 26 मई को हुई एक हालिया घटना को देखते हुए दाखिल की गई थी. अस्पताल में आग लग गई थी जिससे सात नवजात शिशुओं की मौत हो गई थी.

याचिका में अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वे नियम के तहत पहले से बने अग्नि सुरक्षा मानदंडों के अनुपालन को लेकर शहर के छोटे अस्पतालों एवं नर्सिग होम का निरीक्षण करें. उन्होंने एक खबर का हवाला देते हुए कहा कि सरकार के साथ पंजीकृत लगभग एक हजार अस्पतालों में से केवल 196 के पास ही अग्नि अनापत्ति प्रमाण पत्र है.

याचिकाकर्ता का कहना था कि छोटी इमारतों के लिए अग्निशामक यंत्र और स्वचालित अग्नि अलार्म जैसे कुछ बुनियादी अग्नि सुरक्षा मानदंडों का पालन किया जाना चाहिए. क्योंकि नौ मीटर से कम ऊंचाई वाली इमारतों में मानदंडों का पालन नहीं किए जाने से मानव जीवन के लिए खतरा पैदा करता है.

सरकार के वकील ने कोर्ट को बताया कि यह कोई प्रतिकूल कार्यवाही नहीं है. सरकार अग्निशमन मानदंडों में सभी उचित और निष्पक्ष सुझावों को शामिल करने के लिए तैयार है. कोर्ट ने फिर सरकार से उन सभी मुद्दों पर विचार करने और एक ठोस निर्णय लेने को कहा है. साथ ही स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहते हुए सुनवाई 9 अगस्त के लिए स्थगित कर दी.

ये भी पढ़ें- दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी में प्रतिबंधित घोड़ा गाड़ियों या ‘तांगों’ को जब्त करने की मांग वाली याचिका पर एमसीडी से मांगा जवाब

-भारत एक्सप्रेस



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