दिल्ली हाईकोर्ट ने बटला हाउस में बुलडोजर की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है. जस्टिस तेजस करिया की अवकाशकालीन बेंच ने सभी पक्षों की जिरह के बाद फैसला सुरक्षित रखा है. कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में अपना फैसला सुनाएगा.
मामले की सुनवाई के दौरान डीडीए की ओर से पेश वकील ने कहा कि बटला हाउस का पूरा इलाका पीएम उदय योजना के तहत आती है. उन्होंने यह भी कहा कि खसरा नंबर 279 में 43 बीघा जमीन है, जिसमें से 9 बीघा जमीन पर अवैध निर्माण किया गया है. जिसका जवाब देते हुए याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने कहा कि बाकी भूमि पीएम उदय का हिस्सा क्यों नही है.
यह याचिका ओखला से आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान सहित अन्य की ओर से दायर की गई है.
बता दें कि 11 जून को अवकाशकालीन पीठ ने याचिका पर अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि जनहित याचिका पर सामान्य आदेश पारित करना निजी पक्षकारों के लिए नुकसानदेह हो सकता है. जिसके बाद याचिकाकर्ता ने याचिका को वापस ले लिया था.
हालांकि कोर्ट ने याचिकाकर्ता को संबंधित बेंच में याचिका दायर करने के लिए तीन दिन का समय भी दे दिया था. याचिका में कहा गया था कि बटला हाउस के मुरादी रोड़ पर करीब 50 से 60 साल पुरानी बस्ती है. जिसपर कार्रवाई के लिए नोटिस चस्पा किया गया है. दिल्ली विकास प्राधिकरण ने इन इलाकों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी कर चुकी है.
डीडीए ने बटला हाउस के मुरादी रो पर अपना दावा ठोका था और डीडीए का दावा है कि खसरा नंबर 279 का जमीन दिल्ली विकास प्राधिकरण का है और इस पर अवैध तरीके से घर बने हैं. डीडीए द्वारा चस्पा किए गए नोटिस में कहा गया है कि सभी मकान 11 जून 2025 तक खाली कर दें, नहीं तो उसके बाद बुलडोजर की कार्रवाई की जाएगी. जबकि वहां के निवासियों का कहना है कि वह पिछले 50 सालों से वहां रह रहे है और अचानक डीडीए ने अपना दावा ठोक दिया है.
-भारत एक्सप्रेस
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