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अलमारी के पुराने कपड़ों से अब होगी कमाई! दिल्ली मेट्रो के ‘अर्पण केंद्रों’ पर उमड़ी लोगों की भीड़

दिल्ली में पुराने कपड़ों को रखने या उन्हें उचित तरीके से निपटाने की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए दिल्ली मेट्रो के अर्पण केंद्र उपयोगी विकल्प बनकर सामने आए हैं. दिल्ली मेट्रो के 10 स्टेशनों पर बनाए गए इन केंद्रों पर लोग अपने पुराने और उपयोग में नहीं आने वाले कपड़े जमा करा सकते हैं.

रिपोर्ट – तनु चौधरी


नई दिल्ली: घर में पुराने कपड़ों का ढेर लगा है और समझ नहीं आ रहा कि इन्हें कहां दिया जाए? ऐसे लोगों के लिए दिल्ली मेट्रो के अर्पण केंद्र एक आसान विकल्प बनते जा रहे हैं. यहां लोग अपने पुराने और इस्तेमाल में नहीं आने वाले कपड़े जमा कर सकते हैं. इन कपड़ों को सिर्फ कचरे की तरह नहीं देखा जा रहा, बल्कि उन्हें दोबारा इस्तेमाल करने, अपसाइक्लिंग और रीसाइक्लिंग के जरिए नए काम की चीजों में बदला जा रहा है.

दिल्ली मेट्रो के फिलहाल 10 स्टेशनों पर अर्पण केंद्र बनाए गए हैं. 31 अगस्त तक इन केंद्रों पर 3,940 लोगों ने मिलकर 41,181.59 किलोग्राम यानी 41 टन से ज्यादा कपड़े जमा कराए हैं. आंकड़े बताते हैं कि दिल्लीवासियों में इस पहल को लेकर अच्छी भागीदारी देखने को मिल रही है.

अंबेडकर अस्पताल केंद्र पर सबसे ज्यादा कपड़े जमा

कपड़े जमा करने के मामले में डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल मेट्रो स्टेशन का केंद्र सबसे आगे रहा. यहां 9,861.40 किलोग्राम कपड़े जमा हुए. इसके ठीक पीछे शालीमार बाग केंद्र रहा, जहां 9,761.03 किलोग्राम कपड़े लोगों ने दिए.

पंजाबी बाग पश्चिम केंद्र पर 6,534.98 किलोग्राम और शाहदरा केंद्र पर 6,386.08 किलोग्राम कपड़े जमा हुए. वहीं मयूर विहार-1 में 5,189.40 किलोग्राम कपड़े पहुंचे.

बाकी केंद्रों की बात करें तो हौज खास में 1,680.70 किलोग्राम, द्वारका-ककरोला में 689.40 किलोग्राम, मालवीय नगर में 467.40 किलोग्राम, लाजपत नगर में 395.70 किलोग्राम और मोहन एस्टेट में 215.50 किलोग्राम कपड़े जमा किए गए.

इनमें से पांच अर्पण केंद्र 3 अगस्त को शुरू हुए थे. इसके बाद कुछ केंद्र 12 अगस्त और बाकी 17 अगस्त को चालू किए गए.

पुराने कपड़ों से बन रहे बैग, रग और पाउच

अर्पण केंद्रों पर जमा होने के बाद कपड़ों को सीधे आगे भेजने के बजाय उनकी छंटाई की जाती है. कपड़ों की स्थिति और उपयोग की संभावना के आधार पर उन्हें अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाता है. इसके बाद जो कपड़े दोबारा इस्तेमाल या अपसाइक्लिंग के लायक होते हैं, उन्हें अलग रखा जाता है, जबकि बाकी सामग्री को रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाता है.

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक करीब 4,266 किलोग्राम सामग्री को पुनः उपयोग और अपसाइक्लिंग के लिए अलग किया गया है. वहीं लगभग 29,424 किलोग्राम सामग्री रीसाइक्लिंग के लिए भेजी गई है.

पुराने कपड़ों से कई तरह के उपयोगी सामान तैयार किए जा रहे हैं. स्वयं सहायता समूह इन कपड़ों की मदद से रग, फोल्डर, की-रिंग, पाउच, बैग और तोरण जैसी चीजें बना रहे हैं. इन तैयार उत्पादों को अर्पण केंद्रों पर प्रदर्शित भी किया जा रहा है.

यानी किसी घर की अलमारी में बेकार पड़े कपड़े अब किसी दूसरे रूप में काम आ सकते हैं. इससे कपड़ों का इस्तेमाल बढ़ता है और उन्हें सीधे कूड़े में जाने से भी रोका जा सकता है.

पुराने कपड़ों से बने सामान की बिक्री भी

इस पहल की एक और खास बात यह है कि पुराने कपड़ों से तैयार किए गए उत्पाद सिर्फ प्रदर्शित नहीं किए जा रहे, बल्कि उनकी बिक्री भी हो रही है. 10 अर्पण केंद्रों से अब तक कुल 27,036 रुपये की बिक्री दर्ज की गई है.

इस व्यवस्था का मकसद केवल पुराने कपड़े इकट्ठा करना नहीं है. कोशिश यह है कि कपड़ों को उनकी उपयोगिता के हिसाब से दोबारा इस्तेमाल किया जाए और जहां संभव हो, उनसे नए उत्पाद तैयार किए जाएं. इससे कचरा कम करने के साथ-साथ स्वयं सहायता समूहों के लिए आर्थिक गतिविधि का रास्ता भी बनता है.

जनवरी 2027 में 10 और केंद्र खोलने की तैयारी

अर्पण केंद्रों को दिल्ली के ज्यादा इलाकों तक पहुंचाने की भी तैयारी है. इसके लिए 10 नए केंद्र खोलने का प्रस्ताव रखा गया है, जिन्हें जनवरी 2027 में शुरू करने की योजना है.

प्रस्तावित नए केंद्रों में मॉडल टाउन, आईएनए, आईपी एक्सटेंशन, पश्चिम विहार पश्चिम, राजेंद्र प्लेस, जनकपुरी पश्चिम, राजौरी गार्डन, ग्रेटर कैलाश, द्वारका सेक्टर-10 और छतरपुर मेट्रो स्टेशन शामिल हैं.

अगर ये केंद्र भी शुरू हो जाते हैं, तो दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोगों के लिए पुराने कपड़े जमा करना और आसान हो जाएगा.

सीएम रेखा गुप्ता ने पहल को बताया उपयोगी

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अर्पण केंद्रों को पुराने कपड़ों के उचित निपटान की समस्या का व्यावहारिक समाधान बताया है. उनका कहना है कि इन केंद्रों के जरिए पुराने कपड़ों को दोबारा इस्तेमाल और रीसाइक्लिंग के रास्ते उपयोगी उत्पादों में बदला जा रहा है.

उन्होंने यह भी कहा कि दिल्लीवासियों की भागीदारी बढ़ने से इस व्यवस्था को और बड़े स्तर पर लागू किया जा सकता है. उद्देश्य यही है कि लोगों को पुराने कपड़े देने के लिए आसान और सुविधाजनक विकल्प मिले और इन कपड़ों का अधिकतम इस्तेमाल सुनिश्चित हो.

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-भारत एक्सप्रेस



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