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‘Donald Trump जब भारत दौरे पर होंगे, तभी प्रोटेस्‍ट करेंगे…’, SC में पुलिस ने बताया- दंगे संयोग नहीं, सोची-समझी साजिश थी

Delhi Riots: दिल्ली दंगों वाले केसेस में शरजील इमाम की बेल पर SC में पुलिस ने दावा किया कि- शाहीन बाग प्रोटेस्ट ट्रंप दौरे के समय ही प्लान किया गया, यह संयोग नहीं बल्कि साजिश थी. इसके वीडियो सबूत भी पुलिस ने पेश किए.

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

2020 Delhi Riots: दिल्ली के उत्तरी-पूर्वी इलाकों में फरवरी 2020 के भयावह दंगों के मुख्य आरोपी शरजील इमाम समेत छह आरोपियों की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को जोरदार सुनवाई हुई. दिल्ली पुलिस ने याचिका का कड़ा विरोध करते हुए कोर्ट में कई वीडियो क्लिप और सबूत पेश किए, जिसमें शाहीन बाग के विरोध प्रदर्शनों को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे से जोड़कर साजिश का खुलासा किया गया.

पुलिस की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने दलील दी कि यह कोई साधारण विरोध नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति थी, जिसका उद्देश्य शासन परिवर्तन और आर्थिक अस्थिरता पैदा करना था.

साजिश थी- जब ट्रंप भारत में होंगे, तभी बवाल काटेंगे

एएसजी राजू ने कोर्ट में स्पष्ट कहा, “शाहीन बाग के पास प्रोटेस्ट के लिए ट्रंप के दौरे की टाइमिंग चुनी गई. यह संयोग नहीं, बल्कि पूरी तरह साजिश थी.” उन्होंने बताया कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ प्रदर्शनों को ट्रंप की फरवरी 2020 की यात्रा के ठीक समय पर प्लान किया गया, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि खराब हो और मुसलमानों का समर्थन हासिल किया जा सके.

दिल्ली की सप्‍लाई लाइनों से काटना चाहते थे बवालिए

पुलिस ने आरोप लगाया कि आरोपी दिल्ली को सप्‍लाई लाइनों से काटना चाहते थे, खासकर पूर्वोत्तर राज्यों को जोड़ने वाले ‘चिकन नेक’ क्षेत्र को निशाना बनाकर. राजू ने वीडियो में शरजील इमाम के भाषणों का हवाला देते हुए कहा कि वे असम को भारत से अलग करने और हिंसक विरोध की बात करते हैं, जिसमें कश्मीर, तीन तलाक, बाबरी मस्जिद जैसे मुद्दों को भड़काने का प्रयास दिखता है. एक क्लिप में इमाम को कोर्ट को धमकाते हुए कहते सुना गया, “कोर्ट को नानी याद दिला देंगे.”

2020 के दिल्‍ली दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी

पुलिस ने दलील दी कि प्रदर्शनों का मकसद आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति रोककर दिल्ली और पूर्वोत्तर को आर्थिक रूप से कमजोर करना था. एएसजी ने जोर देकर कहा कि इमाम के बयान उकसावे वाले थे, न कि शांतिपूर्ण विरोध के. कोर्ट ने पूछा, “आप कह रहे हैं कि वे उकसा रहे थे?” जिस पर राजू ने हामी भरी. यह सुनवाई दिल्ली दंगों की जांच को नई दिशा दे सकती है, जहां 53 लोगों की मौत हुई थी. अब इस मामले में जमानत पर फैसला सुरक्षित रखा गया है.

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