Digital Payment Fraud India
Digital Payment Fraud India: देश डिजिटल क्रांति के दौर से गुजर रहा है. आज शॉपिंग से लेकर पेमेंट तक की चीजें मोबाइल से ऑनलाइन हो जा रही हैं. जैसे-जैसे डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन बढ़ रहे हैं, उतनी ही तेजी से देश में साइबर ठगी के भी मामले सामने आ रहे हैं.
बैंकों और वित्तीय संस्थाओं की तरफ से लोकसभा में साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2022 से वित्त वर्ष 2025 के बीच पेमेंट फ्रॉड के कुल 5,83,291 मामले दर्ज किए गए. इन मामलों में करीब 3,588.22 करोड़ रुपये की ठगी हुई, जबकि सिर्फ 238.83 करोड़ रुपये ही रिकवर किए जा सके.

इंटरनेट बैंकिंग के जरिये महाठगी
आंकड़ों के मुताबिक सबसे ज्यादा ठगी इंटरनेट बैंकिंग और क्रेडिट कार्य के जरिये की गई. इंटरनेट बैंकिंग से जुड़े 2,42,562 मामलों में 1,730.14 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी दर्ज की गई. जबकि क्रेडिट कार्य के 2,43,849 मामलों में 1,447.27 करोड़ रुपये की रकम जनता से लूट ली गई. वहीं डेबिट और एटीएम कार्ड के जरिये फ्रॉड के 94,991 मामलों में 401.17 करोड़ रुपये की ठगी हुई.

लोगों में आम धारणा है कि UPI के जरिये धोखाधड़ी की जा सकती है, जबकि यह बात पूरी तरह गलत है. जिस UPI ट्रांजैक्शन को लेकर लोगों में सबसे ज्यादा डर देखने को मिलता है, उसके फ्रॉड के सिर्फ 457 मामले ही सामने आए हैं, जिसमें 2.13 करोड़ रुपये की ठगी की गई. वहीं आधार आधारित भुगतान प्रणाली (AePS) से जुड़े 1,346 मामलों में 1.06 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी दर्ज की गई.
रिकवरी रेट काफी कम
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कुल ठगी गई रकम का बेहद छोटा हिस्सा ही वापस मिल पाया है. इंटरनेट बैंकिंग फ्रॉड में 1,730 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी हुई, लेकिन रिकवरी सिर्फ 24.83 करोड़ रुपये की हो सकी. इसी तरह क्रेडिट कार्ड फ्रॉड में 177.78 करोड़ रुपये और डेबिट कार्ड मामलों में 34.91 करोड़ रुपये की रकम ही वापस लाई जा सकी.

विशेषज्ञों के मुताबिक डिजिटल पेमेंट के बढ़ते चलन के साथ साइबर अपराधी नए-नए तरीके अपना रहे हैं. फर्जी लिंक, KYC अपडेट के नाम पर कॉल, स्क्रीन शेयरिंग ऐप और OTP ठगी जैसे मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. ऐसे में लोगों को किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने, OTP साझा करने और बैंकिंग जानकारी देने से बचने की सलाह दी जा रही है.
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सरकार और बैंकिंग संस्थान लगातार साइबर सुरक्षा को मजबूत करने का दावा कर रहे हैं, लेकिन सामने आए आंकड़े बताते हैं कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम में सुरक्षा को लेकर अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है.
-भारत एक्सप्रेस
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