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अस्पताल बना अखाड़ा: पुलिस चौकी के सामने बाप-बेटे को बेरहमी से पीटा, कुल्हाड़ी से हमला कर फरार हुए थार सवार बदमाश

जिला अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था की धज्जियां उड़ाते हुए थार सवार बदमाशों ने एक ग्रामीण और उसके बेटे पर जानलेवा हमला कर दिया. खेत में पानी के विवाद को लेकर शुरू हुई यह रंजिश अस्पताल तक जा पहुँची, जहाँ बदमाशों ने पुलिस की मौजूदगी के बावजूद सरेआम कुल्हाड़ी और लाठियों का इस्तेमाल किया.

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District Hospital Violence: अस्पताल एक ऐसी जगह जहां लोग अपनी जान बचाने और इलाज कराने पहुंचते हैं, वहां अगर सरेआम खून-खराबा होने लगे तो आप खुद को कहां सुरक्षित समझेंगे? कुछ ऐसा ही खौफनाक मंजर आज मध्य प्रदेश के दतिया के जिला अस्पताल परिसर में देखने को मिला. यहां सुरक्षा और कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ाते हुए करीब 8 से 10 बदमाशों ने एक ग्रामीण और उसके बेटे को जानवरों की तरह पीटा. हैरानी की बात यह है कि जहां यह पूरा तांडव हुआ, ठीक उसके सामने पुलिस चौकी है, लेकिन खाकी की मौजूदगी का खौफ गुंडों में रत्ती भर भी नजर नहीं आया.

खेत के पानी का विवाद अस्पताल तक पहुंचा

इस पूरी कहानी की शुरुआत एक मामूली विवाद से हुई थी. जानकारी के मुताबिक, गांव में खेत की सिंचाई के लिए पानी देने को लेकर दो पक्षों में कहासुनी हुई थी. इस झगड़े में घायल होने के बाद पीड़ित पिता और पुत्र इलाज के लिए जिला अस्पताल पहुंचे थे. उन्हें लगा था कि अस्पताल पहुंचकर वे सुरक्षित हैं, लेकिन हमलावर तो जैसे खून के प्यासे होकर उनका पीछा कर रहे थे.

थार से आए बदमाश, मच गया कोहराम

पीड़ित अभी अस्पताल परिसर में ही थे कि अचानक एक थार गाड़ी वहां आकर रुकी. गाड़ी से 8-10 हथियारबंद बदमाश उतरे और बिना कुछ सोचे-समझे बाप-बेटे पर टूट पड़े. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि बदमाशों के हाथों में लाठी-डंडे थे और वे गाली-गलौज करते हुए अंधाधुंध वार कर रहे थे. हद तो तब हो गई जब एक हमलावर ने कुल्हाड़ी निकालकर सीधा प्रहार कर दिया, जिससे एक व्यक्ति गंभीर रूप से लहूलुहान हो गया.

सोती रही पुलिस, गायब रहे गार्ड

इस घटना ने अस्पताल प्रशासन और स्थानीय पुलिस की पोल खोलकर रख दी है. अस्पताल में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, जिनमें यह पूरी वारदात कैद हो गई है, लेकिन वारदात के वक्त न तो वहां कोई सुरक्षा गार्ड दिखा और न ही सामने मौजूद पुलिस चौकी से कोई जवान बाहर निकला. हमलावर आराम से अपनी गाड़ी में बैठकर फरार हो गए और पुलिस हमेशा की तरह ‘मामले की जांच’ का रटा-रटाया बयान दे रही है.

जिला अस्पताल में गुंडागर्दी का यह कोई पहला मामला नहीं है. बार-बार होती ऐसी घटनाओं के बावजूद प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया है. सवाल यह है कि अगर पुलिस की नाक के नीचे आम आदमी सुरक्षित नहीं है, तो फिर आम जनता न्याय और सुरक्षा की उम्मीद किससे करे?

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-भारत एक्सप्रेस



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