महाराष्ट्र के प्रसिद्ध शिक्षाविद्, समाजसेवी और पूर्व राज्यपाल डॉ. डी.वाई. पाटील का उनके कोल्हापुर निवास पर लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. वे 90 से 92 वर्ष के बीच की आयु में थे. परिवार के अनुसार, उन्होंने सुबह अंतिम सांस ली. उनके निधन की खबर फैलते ही राजनीतिक और शिक्षा जगत में शोक की लहर दौड़ गई.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर मराठी में संदेश पोस्ट कर गहरी संवेदना व्यक्त की. मोदी ने लिखा कि डॉ. डी.वाई. पाटील शिक्षा और परोपकार के माध्यम से समाज सेवा में अग्रणी रहे. उन्होंने विशेषकर गरीबों का जीवनमान ऊंचा करने के लिए निरंतर काम किया. उनके निधन को अत्यंत दुखद बताते हुए प्रधानमंत्री ने संवेदना व्यक्त की तथा ‘ओम शांति’ कहा. पोस्ट के साथ PM मोदी और डॉ. पाटील की पुरानी मुलाकात की फाइल फोटो भी साझा की गई.
डॉ. डी. वाय. पाटील हे प्रामुख्याने शिक्षण आणि परोपकाराच्या माध्यमातून समाजसेवेत अग्रणी होते. त्यांनी नेहमीच इतरांचे, विशेषतः गरिबांचे जीवनमान उंचावण्यासाठी सातत्याने कार्य केले. त्यांच्या निधनाचे वृत्त अत्यंत दुःखद आहे. या दुःखद प्रसंगी त्यांच्या कुटुंबीयांप्रती आणि असंख्य… pic.twitter.com/BfXPr6lTpQ
— Narendra Modi (@narendramodi) August 4, 2026
डॉ. डी.वाई. पाटील का जीवन परिचय
डॉ. डी.वाई. पाटील (पूरा नाम दिन्यादेव यशवंतराव पाटील) का जन्म 22 अक्टूबर 1935 को कोल्हापुर जिले के अंबाप गांव में एक किसान परिवार में हुआ था. वे पद्मश्री से सम्मानित शिक्षाविद् थे जिन्होंने डी.वाई. पाटील समूह की स्थापना कर चिकित्सा, इंजीनियरिंग, प्रबंधन समेत कई क्षेत्रों में 150 से अधिक संस्थान खड़े किए. उन्होंने महाराष्ट्र विधानसभा सदस्य के रूप में भी काम किया तथा त्रिपुरा, बिहार और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल पद पर रहे. शिक्षा के निजीकरण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को आम लोगों तक पहुंचाने में उनका योगदान अविस्मरणीय माना जाता है.
उनके पुत्रों में पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता सातेज पाटील, संजय पाटील तथा अजिंक्य पाटील शामिल हैं. अंत्यसंस्कार बुधवार को कोल्हापुर में होने की संभावना है. शिक्षा जगत में उनके योगदान को याद करते हुए कई नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की है.
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