आनंद, गुजरात – गुजरात के आनंद ज़िले के नापा स्थित आदर्श एजुकेशनल कॉम्प्लेक्स में 6 जुलाई को एक ऐतिहासिक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुस्लिम विद्यार्थी प्रगति मंडल द्वारा आयोजित इस सेमिनार का विषय था— “राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक विविधता एवं राष्ट्र निर्माण में अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका : विकसित भारत @2047”। देशभर से आए शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं, प्रशासकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने इस आयोजन में शिरकत की।
संगोष्ठी के मुख्य अतिथि प्रोफ़ेसर (डॉ.) शाहिद अख्त़र थे, जो राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (NCMEI) के कार्यवाहक अध्यक्ष और मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (MRM) के राष्ट्रीय संयोजक हैं। अपने मुख्य उद्बोधन में उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों ने भारत की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने, शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने और सांस्कृतिक विविधता के संरक्षण में अहम भूमिका निभाई है।
‘विकसित भारत’ की नींव है समावेशी शिक्षा
डॉ. शाहिद अख्त़र ने अपने संबोधन में कहा कि “विकसित भारत @2047′ का लक्ष्य तभी साकार होगा जब देश के प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और समान अवसर वाली शिक्षा उपलब्ध होगी”। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों ने विशेष रूप से वंचित एवं कमज़ोर वर्गों तक शिक्षा पहुंचाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है तथा न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे संवैधानिक आदर्शों को सुदृढ़ किया है।
उन्होंने आगे कहा कि शिक्षा केवल रोज़गार प्राप्त करने का ज़रिया नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य नैतिक नेतृत्व, नवाचार, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा भारत की बहुलतावादी परंपरा के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना भी है। उन्होंने शिक्षण संस्थानों से आह्वान किया कि वे उत्कृष्टता के ऐसे केंद्र बनें जो राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करें तथा भारत की भाषाई, सांस्कृतिक एवं धार्मिक विविधता का संरक्षण करें।
ग़ौरतलब है कि इससे पहले भरूच में MRM के एक सम्मान समारोह में डॉ. अख्त़र ने मेधावी छात्रों को संबोधित करते हुए कहा था कि “आप ही भारत का कल हैं, विकसित भारत 2047 की ज़िम्मेदारी आपके कंधों पर है”। उन्होंने छात्रों को बड़े सपने देखने की तालीम देते हुए कहा था कि “आप राष्ट्रपति बनें, प्रधानमंत्री बनें, डॉ. कलाम बनें”।
आरएसएस नेता डॉ. इन्द्रेश कुमार का संबोधन
संगोष्ठी में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक एवं RSS के वरिष्ठ नेता डॉ. इन्द्रेश कुमार भी विशिष्ट रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में शिक्षा की भूमिका पर अपने विचार रखते हुए कहा कि “शिक्षा एक सशक्त, समृद्ध, शांतिपूर्ण और विकसित भारत के निर्माण की सबसे मज़बूत नींव है”।
डॉ. इन्द्रेश कुमार ने यह भी कहा कि अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की ज़िम्मेदारी केवल शिक्षा प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे जागरूक, संस्कारित, कुशल और राष्ट्रनिष्ठ नागरिक तैयार करना भी है, जो संविधान के आदर्शों का पालन करते हुए समाज और राष्ट्र की प्रगति में सक्रिय योगदान दें। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता हमारी सबसे बड़ी ताक़त है और शिक्षा का उद्देश्य युवाओं में राष्ट्रीय एकता, सद्भाव, देशभक्ति और मानवीय मूल्यों की भावना विकसित करना होना चाहिए। “‘विकसित भारत @2047’ का सपना तभी साकार होगा जब प्रत्येक शिक्षण संस्थान चरित्र निर्माण, नवाचार, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण का केंद्र बने”।
विशेषज्ञों के सुझाव और तकनीकी सत्र
संगोष्ठी में आयोजित विभिन्न तकनीकी सत्रों, शोध प्रस्तुतियों एवं पैनल चर्चाओं में विशेषज्ञों ने सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकीकरण और समावेशी विकास में अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका पर विस्तार से विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि इन संस्थानों ने शिक्षा के प्रसार, विशेषकर सामाजिक एवं आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने में ऐतिहासिक योगदान दिया है।
विचार-विमर्श के दौरान ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु अनेक व्यावहारिक सुझाव भी प्रस्तुत किए गए। इनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल साक्षरता, उद्यमिता, पर्यावरणीय सततता, कौशल विकास तथा संवैधानिक मूल्यों को पाठ्यक्रम का अभिन्न हिस्सा बनाने पर बल दिया गया। साथ ही शिक्षकों के सतत प्रशिक्षण, शोध-आधारित शिक्षण पद्धति, संस्थागत नवाचार तथा शिक्षा संस्थानों, सरकार, उद्योग जगत एवं नागरिक समाज के बीच सहयोग को और मज़बूत करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया।
शिक्षा ही है सामाजिक समरसता का माध्यम
संगोष्ठी में यह भी रेखांकित किया गया कि शिक्षा संस्थानों को अभिभावकों, स्थानीय समुदायों तथा सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर ऐसे समावेशी शैक्षणिक वातावरण का निर्माण करना चाहिए, जो शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को भी सुदृढ़ करे।
इस अवसर पर विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं शोधार्थियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई और नेतृत्व क्षमता, नवाचार, समावेशी शिक्षा, डिजिटल परिवर्तन तथा राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रतिभागियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि शिक्षा के माध्यम से ही भारत की बहुलतावादी संस्कृति को सशक्त करते हुए विकसित राष्ट्र के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।
‘विकसित भारत’ के संकल्प के साथ समापन
कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने शिक्षा संस्थानों, नीति-निर्माताओं, नागरिक समाज एवं स्थानीय समुदायों के बीच सहयोग को और अधिक मज़बूत बनाने का संकल्प लिया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान भविष्य में भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सामाजिक समावेशन, सांस्कृतिक सौहार्द और राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।
अंत में मुस्लिम विद्यार्थी प्रगति मंडल ने मुख्य अतिथि प्रोफ़ेसर (डॉ.) शाहिद अख्त़र, डॉ. इन्द्रेश कुमार, सभी वक्ताओं, शिक्षाविदों, प्रतिनिधियों, विद्यार्थियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए शिक्षा, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय विकास के लिए ऐसे संवादों को निरंतर आयोजित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
—- भारत एक्सप्रेस
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