General Naravane India-China border dispute: पूर्व भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने एक इंटरव्यू में विपक्ष के उस दावे को खारिज किया जिसमें कहा गया था कि चीन के साथ तनाव के दौरान भारत ने जमीन खो दी. उन्होंने कहा कि अगर कोई प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री या सेना प्रमुख पर भरोसा नहीं करना चाहता तो फिर किसी भी तरह की दलील से उसकी राय नहीं बदली जा सकती.
सरकार के समर्थन की बात
नरवणे ने साफ किया कि चीन के साथ तनावपूर्ण हालात में उन्हें सरकार का पूरा सहयोग मिला था. उन्होंने यह भी कहा कि उस समय अगर हालात बिगड़ते तो उन्हें चीनी सैनिकों पर गोली चलाने का पूरा अधिकार था.
संसद में उठे सवालों के बाद बयान
यह बयान तब आया है जब कुछ महीने पहले संसद में इस मुद्दे पर तीखी बहस हुई थी. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दावा किया था कि नरवणे की अप्रकाशित किताब फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी में यह लिखा है कि पैंगोंग झील के पास रेचिन ला दर्रे पर जब चीनी सैनिकों से आमना-सामना हुआ था तब प्रधानमंत्री ने रक्षा मंत्री के जरिए कहा था कि जो उचित लगे, वही करो.
पैंगोंग झील का तनावपूर्ण माहौल
उस समय भारतीय सैनिकों ने विवादित क्षेत्र में टैंकों के साथ अपनी स्थिति मजबूत कर ली थी. जब चीनी सेना भारतीय ठिकानों की ओर बढ़ी तो हालात बेहद नाजुक हो गए थे. नरवणे ने कहा कि उन्हें मिले आदेश बिल्कुल स्पष्ट थे और भारतीय सैनिकों को शुरू से ही आत्मरक्षा में गोली चलाने की अनुमति थी.
किताब पर विवाद
नरवणे ने यह भी कहा कि उनकी किताब में ऐसा कुछ नहीं है जिस पर इतना हंगामा किया जाए. उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति की सोच अलग होती है. जमीनी स्तर पर उनकी सोच अलग होगी, जबकि कूटनीतिक या राजनीतिक स्तर पर विचार अलग हो सकते हैं. लोकतंत्र में हर किसी को अपनी राय रखने का अधिकार है.
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-भारत एक्सप्रेस
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