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‘दार-उल-इस्लाम गुजरात’ बनाने की थी साजिश: रिमांड पर चल रहे आरोपियों को मौके पर ले गई एटीएस; पाकिस्तानी हैंडलर से जुड़े तार

Gujarat ATS Jaish Module: गुजरात एंटी टेररिज्म स्क्वॉड यानी ATS ने कथित जैश-ए-मोहम्मद मॉड्यूल मामले में जांच तेज कर दी है. सोमवार को ATS की टीम पुलिस रिमांड पर चल रहे आठ आरोपियों में से तीन को बनासकांठा जिले के पालनपुर स्थित भागल गांव लेकर पहुंची. यहां जांच एजेंसी ने आरोपियों की मौजूदगी में पूरे घटनाक्रम का पुनर्निर्माण कराया.

Gujarat ATS Jaish Module

Gujarat ATS Jaish Module

Gujarat ATS Jaish Module: गुजरात एंटी टेररिज्म स्क्वॉड यानी ATS ने कथित जैश-ए-मोहम्मद मॉड्यूल मामले में जांच तेज कर दी है. सोमवार को ATS की टीम पुलिस रिमांड पर चल रहे आठ आरोपियों में से तीन को बनासकांठा जिले के पालनपुर स्थित भागल गांव लेकर पहुंची. यहां जांच एजेंसी ने आरोपियों की मौजूदगी में पूरे घटनाक्रम का पुनर्निर्माण कराया.

सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों को गांव ले जाने का मकसद यह समझना था कि कथित मॉड्यूल से जुड़ी गतिविधियां किस तरह आगे बढ़ रही थीं. ATS टीम ने घटनाओं की कड़ी को दोबारा जोड़ने, अब तक जुटाए गए सबूतों की पुष्टि करने और आरोपियों से पूछताछ में मिली जानकारी का मौके पर सत्यापन करने की कोशिश की.

जिन तीन आरोपियों को भागल गांव ले जाया गया, उनकी पहचान इब्राहिम मोहम्मद हुसैन घाघा, मुदस्सिर अब्दुल्ला गाजीवाला और अहमद अब्दुल्ला गाजीवाला के रूप में हुई है. पुलिस के अनुसार, अहमद और मुदस्सिर सगे भाई हैं, जबकि इब्राहिम उनका मामा है.

गुजरात और मध्य प्रदेश में 8 आरोपी हुए थे गिरफ्तार

यह कार्रवाई गुजरात और मध्य प्रदेश से आठ आरोपियों की गिरफ्तारी के कुछ दिन बाद की गई है. ATS का आरोप है कि ये आरोपी पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े हुए थे और गुजरात में “दार-उल-इस्लाम गुजरात जैश-ए-मोहम्मद” नाम से एक स्थानीय मॉड्यूल तैयार करने की कोशिश कर रहे थे.

सभी आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी UAPA की धाराएं 13, 17, 18, 38 और 39 के तहत मामला दर्ज किया गया है. इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराएं 61 और 148 भी लगाई गई हैं. गिरफ्तारी के बाद अदालत ने सभी आठ आरोपियों को 14 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया था.

जैश-ए-मोहम्मद के लिए करते थे काम

ATS के डीआईजी सुनील जोशी ने पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि यह समूह गुजरात में ऐसा नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश कर रहा था, जो भविष्य में जरूरत पड़ने पर जैश-ए-मोहम्मद को रसद और अन्य तरह की मदद पहुंचा सके. हालांकि, जांच में अभी तक किसी खास हमले या लक्ष्य का खुलासा नहीं हुआ है.

जांच एजेंसियों का दावा है कि आरोपी पाकिस्तान में बैठे अब्दुल्ला और मोहम्मद उमर नाम के हैंडलरों के संपर्क में थे. आरोप है कि उन्होंने जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े साहित्य का गुजराती भाषा में अनुवाद कर संगठन की विचारधारा फैलाने की कोशिश भी की.

ATS के अनुसार, आरोपियों को ‘डेड-ड्रॉप’ तरीके से करीब 3 लाख रुपये मिले थे. इस रकम के एक हिस्से का इस्तेमाल कथित तौर पर सेकेंड हैंड वाहन खरीदने में किया गया. जांच में यह भी सामने आया है कि अहमद और इब्राहिम मॉड्यूल में अहम भूमिका निभा रहे थे.

पाकिस्तानी हैंडलर के निर्देश पर करता था काम

जांचकर्ताओं के मुताबिक, दोनों ने एक पाकिस्तानी हैंडलर के निर्देश पर वडोदरा में कश्मीर के एक अज्ञात मध्यस्थ से मुलाकात भी की थी. छापेमारी के दौरान ATS ने मोबाइल फोन, हस्तलिखित पत्र, किताबें, डिजिटल फाइलें, अनुवादित साहित्य और कई अन्य सामग्री बरामद की थी. फिलहाल इन सबूतों की बारीकी से जांच की जा रही है.

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भागल गांव में कराया गया घटनाक्रम का पुनर्निर्माण इसी जांच प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है. ATS अब आरोपियों की गतिविधियों, कथित साजिश की टाइमलाइन और बरामद सबूतों के बीच संबंधों को और स्पष्ट करने में जुटी है.

-भारत एक्सप्रेस



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